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नेपाल के एक और पूर्व पीएम व उनकी पत्नी को क्यों गिरफ्तार करने का ऑर्डर हुआ जारी? रेड कॉर्नर नोटिस तक पहुंची बात

पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा और उनकी पत्नी अर्जु राणा देउबा पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है। दोनों अभी विदेश में हैं, सरकार इंटरपोल रेड नोटिस जारी कर वापस लाने की तैयारी में है।

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भारत

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Mukul Kumar

Apr 08, 2026

नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा। (फोटो- IANS)

नेपाल की सियासत में एक बार फिर बवाल मच गया है। पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा और उनकी पत्नी अर्जु राणा देउबा के खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट निकाला गया है। दोनों पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है।

तजा जानकारी के मुताबिक, पूर्व पीएम देउबा और उनकी पत्नी अभी विदेश में हैं, इसलिए नेपाल सरकार अब इंटरपोल की मदद से उन्हें वापस लाने की कोशिश कर रही है।

कोर्ट ने जारी किया ऑर्डर

काठमांडू डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने मंगलवार को मनी लॉन्ड्रिंग जांच विभाग की अर्जी पर यह वारंट जारी किया। जज महेंद्र खड्का की बेंच ने इसकी मंजूरी दी।

सूत्रों के मुताबिक, यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि दोनों को फरार घोषित कर इंटरपोल रेड नोटिस जारी किया जा सके।

पिछले साल के प्रदर्शन का मामला फिर तूल पकड़ा

बता दें कि पिछले साल सितंबर में नेपाल में जेन-जेड आंदोलन के दौरान देउबा के घर समेत कई नेताओं के घरों में आग लगा दी गई थी।

उस समय उनके घर से जले हुए नोटों के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थीं। फॉरेंसिक जांच में पुष्टि हुई कि जले हुए नोट असली थे।

इस घटना के बाद मनी लॉन्ड्रिंग विभाग ने देउबा और उनकी पत्नी, पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली व पुष्प कमल दहाल प्रचंड समेत कई नेताओं की जांच शुरू कर दी। पूर्व ऊर्जा मंत्री दीपक खड्का तो पहले से ही पुलिस हिरासत में हैं।

देउबा दंपति अभी क्यों नहीं लौटे?

देउबा और उनकी पत्नी 26 फरवरी को सिंगापुर चले गए थे। बताया जा रहा है कि दोनों मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए गए थे। इसके एक हफ्ते बाद नेपाल में संसदीय चुनाव हुए, लेकिन देउबा ने चुनाव नहीं लड़ा। उन्होंने जनवरी में ही नेपाली कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था।

चुनाव के बाद वे वापस नहीं लौटे और अब हांगकांग तक चले गए। नई सरकार बनने के बाद उनके खिलाफ जांच और तेज हो गई है। नई सरकार में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जो पुरानी पार्टियों के लिए मुश्किलें बढ़ा रही है।

देउबा 1991 से नेपाल की राजनीति में बड़े नाम रहे हैं। उन्होंने पांच बार प्रधानमंत्री पद संभाला और दादेलधुरा से लगातार चुनाव जीतते आए। लेकिन अब हालात उनके खिलाफ जाते दिख रहे हैं।

क्या होगी आगे की रणनीति?

अब देखना यह है कि देउबा दंपति कब और कैसे नेपाल लौटते हैं। अगर इंटरपोल रेड नोटिस जारी हो गया तो विदेश में भी उन्हें पकड़कर नेपाल भेजा जा सकता है।

नेपाल की राजनीति में यह घटना पुरानी सत्ता और नई ताकतों के बीच चल रहे संघर्ष को और साफ दिखा रही है। आम लोग भी इस पूरे मामले पर नजर रखे हुए हैं।