
बलूचिस्तान में बलूच विद्रोही
Extra judicial Killing: बलूचिस्तान के मस्तुंग जिले (Mastung District) से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पाकिस्तान के सुरक्षा बलों (Security Forces) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ईद-उल-फित्र (Eid-ul-Fitr) की पूर्व संध्या पर, जब पूरा परिवार त्योहार की तैयारी कर रहा था, तब फ्रंटियर कोर (Frontier Corps) के जवानों ने किल्ली करेज़ सोर इलाके में एक घर पर धावा बोल दिया (Balochistan Human Rights)। बिना किसी वारंट (Search Warrant) या कानूनी प्रक्रिया के, सुरक्षा बलों ने मोहम्मद आमिर (Mohammad Amir) नामक युवक को उसके घर से खींच कर बाहर निकाला और अंधाधुंध गोलीबारी (Open Fire) कर उसकी हत्या कर दी। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में मानवाधिकार उल्लंघन (Human Rights Violation) की बहस को फिर से गरमा दिया है।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि एफसी (FC) के जवानों ने घर में घुसते समय न तो कोई पहचान पत्र दिखाया और न ही कोई गिरफ्तारी वारंट पेश किया। आमिर के पिता दिल मुराद ने बताया कि उनके बेटे का किसी भी आपराधिक गतिविधि से कोई लेना-देना नहीं था। जवानों ने बिना किसी पूछताछ के उसे निशाना बनाया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पूरी तरह से एक लक्षित हत्या (Targeted Killing) का मामला है, जो बलूचिस्तान में आम होती जा रही है।
घटना के बाद पुलिस और सुरक्षा बल आमिर के शव को अपने साथ ले गए। परिवार को करीब 12 घंटे तक अंधेरे में रखा गया और शव वापस करने के बदले में उन्हें एक अज्ञात दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया। परिजनों का दावा है कि उन्हें वह कागज पढ़ने तक नहीं दिया गया। खबर है कि इलाके के बुजुर्गों (Local Elders) पर भी इसी तरह का दबाव डाला गया ताकि सुरक्षा बलों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न हो सके।
आमिर की मां ने बिलखते हुए कहा कि उन्होंने अपने बच्चों को बड़ी मुश्किलों से पालकर बड़ा किया था, लेकिन पाकिस्तानी फौज ने एक पल में उनका सहारा छीन लिया। बलूचिस्तान पोस्ट (Balochistan Post) के अनुसार, इस घटना के बाद से स्थानीय आबादी में भारी दहशत है। लोगों का कहना है कि अब वे अपने घरों के अंदर भी सुरक्षित नहीं हैं। सुरक्षा बलों की इस चुप्पी ने जनता के गुस्से को और बढ़ा दिया है।
बलूचिस्तान में 'जबरन गुमशुदगी' और 'फेक एनकाउंटर' की घटनाएं कोई नई नहीं हैं। अक्सर युवाओं को हिरासत में लिया जाता है और फिर उनकी लाशें मिलती हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि जवाबदेही की कमी और मनमानी गिरफ्तारियों के कारण बलूचिस्तान में राज्य संस्थानों के प्रति विश्वास पूरी तरह खत्म हो चुका है। यह असुरक्षा बलूचिस्तान को और अधिक अस्थिरता की ओर धकेल रही है।
इस घटना ने पाकिस्तान सरकार के उन दावों की पोल खोल दी है जिनमें वह बलूचिस्तान में शांति और कानून व्यवस्था की बात करती है। निहत्थे नागरिक की घर में घुसकर हत्या करना युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है।
स्थानीय बलूच मानवाधिकार संगठन इस मामले को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। मस्तुंग में सुरक्षा बलों के खिलाफ बड़े विरोध प्रदर्शन की आशंका जताई जा रही है।
रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा बल अक्सर "आतंकवाद विरोधी अभियान" के नाम पर निर्दोष स्थानीय लोगों को निशाना बनाते हैं, जिससे अलगाववादी विचारधारा को और अधिक हवा मिलती है। ( इनपुट : ANI)
Published on:
23 Mar 2026 08:45 pm
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