
कोविड-19 चीन अपडेट (सोर्स: ANI एक्स स्क्रीनशॉट)
China Covid Deaths Report: कोविड-19 महामारी को भला कौन भूल सकता है। कई साल बीत चुके हैं, लेकिन इससे जुड़े खुलासे अब भी चौंका रहे हैं। दुनिया में पहली बार 2019 में चीन के वुहान से सामने आए इस वायरस ने कई करोड़ लोगों की जान ली। अब, करीब 6 साल बाद आई एक नई रिपोर्ट ने चीन के आधिकारिक आंकड़ों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, 65 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में Covid-19 के कारण 1.44 मिलियन से 2.56 मिलियन के बीच मौतें हुई। यह संख्या चीन द्वारा बताए गए आंकड़ों से कहीं ज्यादा है। खास बात यह है कि ये अनुमान कई ‘इंडिपेंडेंट स्टडीज’ से भी मेल खाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या महामारी के दौरान हुई मौतों की डेटा को चीन ने क्यों छिपाया?
इटली की ऑनलाइन मैगजीन ‘बिटर विंटर’ की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने करीब तीन साल तक अपनी सख्त जीरो-कोविड नीति के तहत महामारी को कंट्रोल करने की कोशिश की। इसमें बड़े पैमाने पर टेस्टिंग, डिजिटल निगरानी, क्वारंटाइन और कड़े लॉकडाउन शामिल थे। कई बार एक व्यक्ति में लक्षण दिखने पर पूरे इलाके को सील कर दिया जाता था। शुरुआत में यह तरीका काम करता दिखा और चीन ने वायरस को काफी हद तक नियंत्रित रखा।
लेकिन 2022 के आखिर तक हालात बदलने लगे। ओमिक्रॉन वेरिएंट तेजी से फैलने लगा और सख्त नियम भी उसे रोक नहीं पाए। लगातार पाबंदियों से लोग परेशान हो गए और देश में बड़े विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए, जो 1989 के बाद सबसे बड़े माने गए। कई लोगों ने लॉकडाउन खत्म करने और यहां तक कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग के इस्तीफे की मांग भी की। आखिरकार, सरकार ने 7 दिसंबर 2022 को अचानक ज़ीरो-कोविड नीति खत्म कर दी।
रिपोर्ट के मुताबिक, जीरो-कोविड नीति खत्म होने के बाद हालात जल्दी ही बिगड़ गए। अचानक संक्रमण तेजी से बढ़ा और चीन का हेल्थ सिस्टम दबाव में आ गया। कुछ ही घंटों में मेडिकल स्टोर पर बुखार की दवाएं खत्म हो गईं, अस्पताल मरीजों से भर गए और जरूरी एंटीवायरल दवाओं की कमी हो गई।
रिपोर्ट में बताया गया कि 2022 के आखिरी हफ्ते में मौतों की संख्या सामान्य समय से कई गुना बढ़ गई। एक हफ्ते में मौतें लगभग 10 गुना तक पहुंच गईं। मौत की दर सामान्य से 1030% ज्यादा हो गई थी, जो अगले हफ्ते 680% तक गिर गई और फरवरी 2023 तक फिर से सामान्य स्तर पर आ गई। हालांकि यह संकट पांच हफ्तों से भी कम समय चला, लेकिन इसका असर काफी बड़ा था। 2022 में कुल मौतों की दर 19% बढ़ी और 2023 में 24% तक पहुंच गई। रिपोर्ट के अनुसार, समस्या यह थी कि पाबंदियां अचानक हटा दी गईं, जिससे हालात संभालना मुश्किल हो गया।
Published on:
17 Apr 2026 11:10 pm
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