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चीनी वैज्ञानिकों ने तैयार किया तिब्बती बकरों का क्लोन, बताया ये मकसद

Tibetan goats clone: वैज्ञानिकों ने 28 साल पुरानी तकनीक का इस्तेमाल कर पहली बार बंदर की भी क्लोनिंगचीनी तैयार किया तिब्बती बकरों का क्लोन। एक स्वस्थ, बच्चे में सरोगेट मां का कोई डीएनए नहीं।

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Chinese scientists clone Tibetan goats

चीनी वैज्ञानिकों ने तैयार किया तिब्बती बकरों का क्लोन,

Tibetan goats clone: चीन ने दावा किया है कि उसे पहली बार तिब्बत के बकरों का क्लोन बनाने में कामयाबी मिली है। इसके लिए उसी तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जो दुनिया की पहली क्लोन भेड़ के लिए की गई थी। इस तकनीक से चीन पहले बंदर की क्लोनिंग भी कर चुका है। चीनी वैज्ञानिकों ने सोमेटिक सेल क्लोनिंग तकनीक का इस्तेमाल किया। इसमें एक वयस्क कोशिका के केंद्रक (न्यूक्लियस) को अंडे वाली कोशिका में स्थानांतरित किया गया। अंडे को सेरोगेट बकरी के गर्भ में डाला गया, जिसने ऐसे बच्चे को जन्म दिया, जिसमें उसका कोई डीएनए नहीं था। इसी तकनीक से तिब्बती बकरे का एक और क्लोन बनाया गया। चीन के सरकारी न्यूज चैनल चाइना सेंट्रल टीवी की ओर से जारी वीडियो में बताया गया कि पहला बच्चा 7.4 पाउंड का था और स्वस्थ है, लेकिन दूसरे क्लोन के बारे में कोई ब्योरा नहीं दिया गया।

जेनेटिक संरचना की क्लोनिंग से कॉपी

चीनी वैज्ञानिक बकरियों के खास तरह के जेनेटिक पदार्थ संरक्षित कर रहे हैं। इनके जरिए पूरी जेनेटिक संरचना क्लोनिंग कर कॉपी की जा सकती है। इसका मकसद अनुवांशिकी संसाधन बढ़ाना है, ताकि स्थानीय किसानों की आय बढ़े और पशुपालन उद्योग का विकास हो सके। चीनी वैज्ञानिकों का कहना है कि क्लोनिंग की यह तकनीक लगती आसान है, लेकिन इसे अमल में लाना बहुत मुश्किल है।

अच्छा ऊन हासिल करना भी मकसद

चीनी वैज्ञानिकों की टीम ने ऐसे तिब्बती बकरों का क्लोन बनाया है, जो भारी मात्रा में ऊन पैदा करते हैं। इस प्रयोग का मकसद अच्छा ऊन पैदा करने वाले बकरे बनाना भी है। स्कॉटलैंड के वैज्ञानिक इयान विल्मट और कीथ कैम्पबल ने 1996 में भेड़ का 'डॉली' नाम का क्लोन तैयार किया था। पहली बार किसी स्तनधारी जीव से निकाली गई कोशिका के यह क्लोन बनाया गया था।

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