
आज से करीब सात दशक पहले एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नोर्गे दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत माउंट एवरेस्ट पर विजय पाने वाले पहले पर्वतारोही बन गए थे। मई, 1953 में इस अविश्वसनीय उपलब्धि के बाद से एवरेस्ट के शिखर पर तेजी से भीड़ बढ़ रही है और जहां-तहां कचरा बिखरा हुआ है। इस साल नवंबर तक 656 लोगों ने एवरेस्ट पर फतेह हासिल की। इनमें अमरीका, चीन, ब्रिटेन, जापान, भारत और नेपाल आदि देशों के पर्वतारोही शामिल थे। यह संख्या पिछले साल के मुकाबले भले ही कम हो लेकिन एवरेस्ट पर बढ़ती भीड़ चिंताएं बढ़ा रही है। वहीं पर्वतारोहण के उपकरणों में प्रगति से भी हाल के वर्षों में अधिक पर्वतारोही शिखर पर पहुंचने लगे हैं।
आकर्षक व्यवसाय बनी एवरेस्ट पर चढ़ाई
द हिमालयन डाटाबेस के अनुसार 2015 में आए भूकंप और कोविड-19 महामारी ने पहाड़ पर गतिविधियों को बाधित कर दिया था। लेकिन अब एवरेस्ट पर चढ़ाई आकर्षक और लाभकारी व्यवसाय बनती जा रही है। खासतौर से पश्चिमी देशों के लोग परमिट के लिए 10,000-1,00,000 डॉलर तक की बड़ी रकम खर्च करने को तैयार हैं।
लंबी प्रतीक्षा अवधि खड़ी कर रही मुसीबतें
2000 के दशक से ही एवरेस्ट पर जाने वाले पर्वतारोहियों की भीड़ लगातार बढ़ती रही है जिससे शिखर के पास भारी गतिरोध और प्रतीक्षा अवधि लंबी हो गई है। यह प्रतीक्षा अवधि भी खतरे से भरी होती है जिससे कुछ मामलों में पर्वतारोहियों को थकावट, पानी की कमी जैसी परेशानियां होती हैं और कई बार उनकी मृत्यु हो जाती है। सिर्फ मई, 2019 में पहाड़ पर 11 लोग मारे गए, जिनमें भारत, आयरलैंड, ब्रिटेन और अमरीका के पर्वतारोही शामिल थे।
पुराना नियम हो सकता है दीर्घकालिक समाधान
इस वर्ष माउंट एवरेस्ट पर पहले से कहीं अधिक पर्वतारोहियों की मृत्यु हुई। मरने वालों में 10 देशों के पर्वतारोही शामिल थे। एवरेस्ट पर अधिक संख्या में लोगों का जाना पूरी स्थिति को ट्रैफिक जाम में बदल देता है। कतार इसलिए भी लंबी हो जाती हैै क्योंकि सभी चढ़ाई के लिए उचित मौसम का इंतजार करते हैं। इसके अलावा कम अनुभव वाले पर्वतारोहियों के कारण भी कतार बढ़ती है। 1985 तक नेपाल में किसी समय में शिखर तक जाने वाले प्रत्येक मार्ग पर केवल एक अभियान दल को अनुमति दी जाती थी। बढ़ती चिंताओं के मद्देनजर भीड़ को कम करने के लिए उस नियम को दोबारा लागू करना एक दीर्घकालिक समाधान साबित हो सकता है।
एवरेस्ट पर पहुंचने वाले प्रमुख देश और उनकी संख्या
देश पर्वतारोही
नेपाल 1856
अमरीका 783
भारत 544
चीन 544
ब्रिटेन 421
स्रोत: द हिमालयन डाटाबेस
डाटा: 1953-2023
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Published on:
19 Dec 2023 09:20 am
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