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AI के विकास की रफ्तार पर ब्रेक लगाने की मांग, डोनाल्ड ट्रंप से 1100 विशेषज्ञों की बड़ी अपील

AI के बढ़ते खतरे को लेकर 1100 से अधिक विशेषज्ञों ने डोनाल्ड ट्रंप से AI के विकास की रफ्तार धीमी करने की अपील की। सुरक्षा नियमों और निगरानी को लेकर जताई चिंता।
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AI experts urge Donald Trump to slow AI development.

अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (File photo/ANI)

AI regulation: दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच विशेषज्ञों ने एक बार फिर इसे लेकर आगाह किया है। दुनिया की बड़ी एआई और तकनीकी कंपनियों के 1100 से ज्यादा कर्मचारियों ने अमेरिका के ट्रंप प्रशासन से एआई के विकास की रफ्तार धीमी करने की अपील की है। इस संबंध में उनका कहना है कि एआई बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन उसकी सुरक्षा और निगरानी के नियम उतनी तेजी से नहीं बन पा रहे हैं। इसको लेकर खुले पत्र में कर्मचारियों ने कहा कि सरकार को दूसरे देशों के साथ मिलकर ऐसा सिस्टम बनाना चाहिए जिससे जरूरत पड़ने पर एआई के विकास की गति कम की जा सके। इस पत्र पर ओपनएआई, एंथ्रोपिक, मेटा, गूगल और दूसरी बड़ी एआई कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने हस्ताक्षर किए हैं।

दो एआई मॉडल तोड़ चुके हैं सुरक्षा घेरा

आपको बता दें कि यह अपील ऐसे समय आई है, जब पिछले सप्ताह ओपनएआई ने बताया था कि उसके परीक्षण के दौरान दो एआई मॉडल सुरक्षा व्यवस्था को पार कर खुले इंटरनेट तक पहुंच गए और एक दूसरी कंपनी के आंतरिक सिस्टम में भी घुस गए। इस घटना ने एआई की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।

सैम ऑल्टमैन ने भी जताई चिंता

पत्र में कहा गया है कि अगर एआई की क्षमता इसी तरह तेजी से बढ़ती रही तो इंसानों के लिए उसे समझना और नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है। इसलिए उद्योग, सरकार और समाज को सुरक्षा उपाय मजबूत करने के लिए समय मिलना चाहिए। ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने भी कहा कि अब शायद एआई के विकास की गति कुछ समय के लिए धीमी करनी पड़े, ताकि समाज और सरकारें नई तकनीक के हिसाब से खुद को तैयार कर सकें।

विशेषज्ञों ने पत्र में कहा कि अगर एआई के विकास पर समय रहते प्रभावी निगरानी नहीं की गई तो इसके दुरुपयोग, साइबर हमलों, गलत सूचना और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर खतरा बढ़ सकता है। उनका मानना है कि नई तकनीक के विकास के साथ-साथ पारदर्शिता, जवाबदेही और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा सुरक्षा मानकों को भी समान गति से लागू करना जरूरी है।