
अमेरिका ने ईरान पर बरसाए B-52 बम । ( फोटो: द वॉशिंगटन पोस्ट)
Bombardment : अमेरिका (United States) और ईरान (Iran) के बीच तनाव अब चरम पर पहुँच गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के आदेश पर अमेरिकी वायुसेना ने अपने सबसे घातक बी-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस (B-52 Stratofortress) बमवर्षकों को युद्ध के मैदान में उतार दिया है। ये विमान ब्रिटेन के रॉयल एयर फोर्स फेयरफोर्ड बेस से उड़ान भरकर सीधे ईरान के सैन्य ठिकानों पर भारी बमबारी (Aerial Bombardment) कर रहे हैं। इस ऑपरेशन को 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' (Operation Epic Fury) का नाम दिया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य ईरान की हमला करने की क्षमता को पूरी तरह से नष्ट करना है।
ईरान ने दशकों से पहाड़ों के नीचे 'मिसाइल सिटी' (Missile Cities) का एक विशाल जाल बिछाया हुआ है। इन सुरंगों में हज़ारों की संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन (UAV Capabilities) तैनात हैं। तेहरान का दावा है कि ये सुरंगें इतनी गहरी और मजबूत हैं कि उन पर किसी भी बमबारी का असर नहीं होगा। हालांकि, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन (Pentagon) ने अब इन सुरंगों को भेदने के लिए खास बंकर-बस्टर बमों (Bunker Buster Bombs) का इस्तेमाल शुरू कर दिया है, जो ज़मीन के 100 फीट नीचे तक जाकर विस्फोट करने में सक्षम हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए नहीं खोलता, तब तक बमबारी जारी रहेगी। उन्होंने कहा है कि अमेरिका "ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे और परमाणु ठिकानों (Nuclear Infrastructure) को मलबे के ढेर में बदल देगा।" ताजा रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी बी-52 और बी-1 लांसर बॉम्बर्स ने ईरान के इस्फहान और नटांज जैसे संवेदनशील इलाकों में कई खुफिया प्रवेश द्वारों को सील कर दिया है, जिससे सैकड़ों ईरानी लड़ाके सुरंगों के भीतर ही फंस गए हैं।
जवाब में, ईरान ने भी इजराइल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों (Ballistic Missiles) से हमले किए हैं। इस युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें (Oil Prices) $100 प्रति बैरल के पार पहुँच गई हैं। ईरान की वायु रक्षा प्रणाली (Air Defense System) को भारी नुकसान पहुँचा है, लेकिन उनके पास अभी भी बड़ी मात्रा में ड्रोन और कामिकेज़ विमान मौजूद हैं, जो क्षेत्र में शांति के लिए बड़ा खतरा बने हुए हैं।
इस भीषण बमबारी के बीच, ट्रंप ने दावा किया है कि तेहरान अब बातचीत (Nuclear Deal Negotiations) के लिए तैयार है और "एक बड़ा समझौता" होने वाला है। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय ने इन दावों को खारिज करते हुए इसे ट्रंप की सैन्य योजना को लागू करने के लिए समय खरीदने की चाल बताया है। वर्तमान में स्थिति यह है कि अमेरिका ने तेल और गैस ठिकानों पर हमले फिलहाल 5 दिनों के लिए टाल दिए हैं, ताकि कूटनीतिक रास्ते तलाशे जा सकें।
अंतरराष्ट्रीय सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि बी-52 बॉम्बर्स का इस्तेमाल यह दर्शाता है कि अमेरिका अब ईरान के हवाई क्षेत्र पर पूर्ण नियंत्रण हासिल कर चुका है और वह किसी भी समय बड़े ज़मीनी हमले की तैयारी कर सकता है। आने वाले 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि यदि होर्मुज का रास्ता नहीं खुला, तो ट्रंप प्रशासन ईरान के रिफाइनरी नेटवर्क पर सीधे प्रहार कर सकता है, जिससे दुनिया भर में ऊर्जा संकट और गहरा जाएगा। जहां एक तरफ युद्ध जारी है, वहीं अमेरिका के भीतर भी इन हमलों को लेकर राजनीति गरमाई हुई है। आलोचकों का मानना है कि यह युद्ध अमेरिका को एक और लंबे संघर्ष में धकेल सकता है।
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Updated on:
25 Mar 2026 08:20 pm
Published on:
25 Mar 2026 08:19 pm
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