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क्या NATO देशों में पड़ गई फूट? ईरान युद्ध के बीच डोनाल्ड ट्रंप बोले-वे हमारे साथ नहीं तो हम उनके साथ क्यों रहे

Donald Trump blast NATO: क्या अमेरिका और NATO की राहें अलग होने वाली हैं? राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ जारी भीषण युद्ध और ऊर्जा संकट के बीच नाटो देशों को कड़ी चेतावनी दी है। अब अनुच्छेद 5 पर संशय ने नाटो देशों की चिंता जरूर बढ़ा दी होगी। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

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us presidents Donald Trump on NATO and Middle East Conflict

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Photo-IANS)

Donald Trump on NATO Countries: मध्य-पूर्व में आज 28 मार्च को जंग का 29वां दिन है। ईरान अमेरिका और इजरायल जंग जल्दी खत्म होता नहीं दिख रहा है। इस जंग के चलते दुनिया के कई देशों को ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी तरफ ईरान के साथ जंग में NATO देशों से सहयोग नहीं मिलने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बेहद नाराज हैं। ऐसे में उन्होंने साफ-साफ इशारा कर दिया है कि अब अमेरिका और नाटो देशों की राहें अलग होने जा रही है।

उन्होंने कहा, अगर सहयोगी देश ईरान के खिलाफ युद्ध में साथ नहीं दे रहे हैं तो अमेरिका को भी उनके लिए खड़े होने की जरूरत नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार की रात मियामी में आयोजित एक निवेश कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यही नहीं रुके, उन्होंने कहा नाटो देशों को निशाने पर लेते हुए कहा, हम हमेशा, उनके लिए खड़े रहते हैं, लेकिन अब उनके रवैये को देखते हुए लगता है कि हमें ऐसा करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्हें भरोसा नहीं है कि किसी बड़े संकट में नाटो देश अमेरिका का साथ देंगे। ट्रंप के इस बयान से यह सवाल उठ खड़े हुए हैं कि क्या अमेरिका NATO देशों के साथ अनुच्छेद 5 का पालन करेगा, जिसमें कहा गया है कि एक देश पर हमला, सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा।

ईरान पर सख्त हमले: ट्रंप

नाटो पर बरसने के दौरान मियामी में उन्होंने यह भी कहा कि ईरान पर इतने सख्त हमले हो रहे हैं कि कोई भी देश ऐसी स्थिति में बातचीत को मजबूर हो जाएगा। उन्होंने फिर कहा कि ईरान बातचीत कर रहा है, लेकिन उनके अधिकारी बार-बार झूठ बोल रहे। हालाकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि अमेरिका ईरान के किस नेता या अधिकारी के संपर्क में है।

नाटो देशों से क्यों बिगड़े रिश्ते?

अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान नाटो देशों के साथ रिश्ता उतार चढ़ाव वाला रहा है। ट्रंप द्वारा डेनमार्क के ग्रीनलैंड पर कब्जा, कनाडा को अमेरिका में शामिल करने की धमकी देना, ब्रिटिश पीएम और फ्रांस के राष्ट्रपति का सार्वजनिक तौर पर मजाक उड़ाना, साथ ही ईरान युद्ध में सहयोगी देशों को भरोसे में नहीं लेना अमेरिका के साथ संबंध बिगड़ने के कारण रहे हैं।