
Eid-ul-Adha-2024
Eid ul-Adha 2024 : ईदुल-ज़ुहा को ईदुल-अज़हा या ईदे कुर्बां कहते हैं। अरबी भाषा में दुआद व्यंजन के लिहाज से अज़हा को अदहा बोला जाता है, इसलिए अंग्रेजी और रोमन में भी ईदुल-अदहा लिखते हैं, लेकिन ईदुल-अज़हा उच्चारण किया जाता है। इस्लामी कैलेंडर और चांद के मुताबिक नीदरलैंड में 15 या 16 जून को ईदुल जुहा मनाई जाएगी।
जिस दिन दुबई में ईद होती है, प्रवासी भारतीय और एशियाई समुदाय भी यहां उसी दिन ईद मनाता है। ईदुल जुहा के अवसर पर NRI Writer डॉ. ऋतु शर्मा नंनन पांडे ( Dr. Ritu Sharma Nannan Pandey ) ने सीधे नीदरलैंड से ईद का माहौल बताया :
उन्होेंने बताया कि यह ईद हर साल इस्लामी हिजरी सन के जिल्हज महीने की 10 तारीख को मनाई जाती है। नीदरलैंड के निजमेजेन, ग्रोनिंगन, ब्रेडा, आइंडहोवेन, टिलबर्ग, एम्स्टर्डम, यूट्रेक्ट, डेन हाग, रॉटरडैम, अल्मेरे स्टैड और अन्य शहरों के मुस्लिम धूमधाम से ईद मनाते हैं। नीदरलैंड (Netherlands) में ईद के दिन यहां भी लोग एक दूसरे को ईद मुबारक ( Eid Mubarak) कहते हैं और एक दूसरे को गले लगाते हैं हैप्पी ईद ( Happy Eid) कहने और एक दूसरे के यहां लंच और डिनर का सिलसिला शुरू होता है, जो तीन दिन तक चलता है।
डॉ. नंनन पांडे ने बताया कि अन्य देशों की तरह बकरा ईद ( Offer Feest) नहीं मनाया जाता। यहाँ पर लोग क़ुर्बानी के लिए जीव ख़रीद कर या तो कसाई घर में दे देते हैं या फिर वहाँ से क़ुर्बानी करवा कर घर लाते हैं । यहाँ पर घरों में क़ुर्बानी की रस्म अदा करना मना है। इसके बाद घर के सभी सदस्य एक दूसरे के साथ ईद मनाते हैं । तीन दिनों का यह त्यौहार बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। यहाँ के स्थानीय टेलीविजन पर भी इस त्यौहार के बारे में बताया जाता है। यहाँ पर मस्जिद में केवल पुरुष ही नमाज़ के लिए जाते हैं । स्त्रियाँ घर पर ही नमाज़ अदा करती हैं।
उन्होंने बताया कि यहां पर ईद की नमाज़ सिर्फ़ मस्जिद में ही अदा की जाती है। मस्जिद के बाहर सड़क या सार्वजनिक स्थान पर नमाज़ नहीं पढ़ी जाती, क्योंकि नमाज़ ख़ुदा के लिए अदा की जाती है ,जिसे हमेशा साफ़ सफ़ाई वाली जगह ही पढ़ना चाहिए, इसलिए यहाँ के मुस्लिम समुदाय के लोग मस्जिद के बाहर नमाज़ नहीं पढ़ते।
डॉ. ऋतु शर्मा नंनन पांडे ने बताया कि कुछ विशेष कार्यालयों या स्कूलों में जहाँ मुस्लिम समुदाय के लोग अधिक है, वहाँ स्कूल व कार्यालयों में नमाज़ के लिए अलग से एक कमरा या हाल बना होता है । ताकि रमज़ान के महीने में या विशेष अवसरों पर वहाँ के मुस्लिम कर्मचारी या विद्यार्थी वहाँ आराम से नमाज़ पढ़ सके। वैसे तो नीदरलैंड में ईसाई त्यौहार के अतिरिक्त कोई राजकीय अवकाश नहीं होता पर यहाँ सभी को यह हक़ है कि वह अपने अपने धर्मों के विशेष त्यौहार के लिए काम , स्कूल से छुट्टी ले सकते हैं ।
उन्होंने बताया कि नीदरलैंड में ईद के व्यंजन ज़्यादातर अरबी तरीक़े से ही बनाये जाते है और क्योंकि दूसरे युद्ध के समय यहाँ इमारतों और सड़कों की बहुत क्षति हुई थी, इसलिए टर्की व मोरक्को से यहाँ पाँच पाँच साल के लिए मज़दूर लाये गए थे, जिसमें से कुछ पाँच साल के कॉन्ट्रैक्ट के बाद वापस अपने देश चले गए थे और कुछ यहाँ रह गए थे । इसलिए अरब मुस्लिम व उत्तरी यूरोपीय मुस्लिम की यहाँ बहुलता है।
डॉ. ऋतु शर्मा नंनन पांडे ने बताया कि यहाँ बकलावा, फलाफल, कुसकुस, तंदूरी चिकन, नान, ओलाईव चीज़, मक्खन दही व सब्ज़ियों का भी बहुत अधिक मात्रा में उपयोग किया जाता है । सेंवई के केक, पिस्ता के केक और बिस्कुट आदि ज़्यादा बनते है। पाकिस्तान, इंडोनेशिया, बांग्लादेश व भारतीय मुस्लिम एशियाई पकवान बनाते है। उनकी तरह इंडोनेशिया के लोग बहुत अधिक तरह का मांसाहारी खाना बनाते है।
उन्होंने बताया कि नीदरलैंड में मुस्लिम महिलाएं अधिकतर फ़ोटो खिंचवाने से परहेज़ करती हैं। फरीबा (Fareeba) मोरक्को से हैं - वे बताती है कि ईद आने से कई दिनों पहले वह घर की साफ़ सफ़ाई, सजावट व कपड़ों की ख़रीदारी में लग जाती हैं । ईद से एक दिन पहले सब मिल कर मेंहदी लगाते है। काँच की चूड़ियाँ यह लोग नहीं पहनते, इसलिए सोने के ही सारे गहने पहने जाते है।
डॉ. ऋतु शर्मा नंनन पांडे ने बताया कि औरतें घर में रह कर नमाज़ अदा करती है व ईद के विशेष पकवान जैसे नारियल के बिस्कुट, चॉकलेट केक, कुसकुस, हरीरा एक तरह का गाल का सूप, भेड़ के गोश्त के कोफ्ते, फलाफल, बकलावा, ब्रेड व नान चावल आदि बनाती है। बच्चों व परिवार के सदस्यों को उपहार दिए जाते हैं । इसलिए उनके लिए ईद का समय बहुत व्यस्तता से भरा होता है।
उन्होंने बताया कि नीदरलैंड में ईद की शॉपिंग के लिए कई बाज़ार हैं। जैसे : देनहॉग, रौतदाम, अमस्टर्डदाम व यूतरेखत शहरों में बहुत सारी दुकानें हैं, जहां आप ईद की ख़रीदारी आसानी से कर सकते हैं । बेफरवाइक बाज़ार बहुत बड़ा बाज़ार है जो क़रीब दो एकड़ में बना है और यंहाँ पर दुबई गोल्ड बाज़ार है। भारतीय परिधानों से लेकर अरबी परिधान, ज़ेवर, घर का सामान, मसाले, मेवे व मिठाई सब ख़रीदा जा सकता है। ईद पर यहाँ मेहंदी भी लगाई जाती हैं । टर्की , मोरक्को, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, भारतीय व बांग्लादेशी हरी मेंहदी का प्रयोग करते हैं । अफ़्रीका के लोग सूडानी, केन्या, सोमाली व आदी काली मेंहदी का उपयोग करते हैं।
लेखिका डॉ ऋतु शर्मा नंनन पांडे का 9 फ़रवरी को नई दिल्ली में जन्म हुआ। दिल्ली विश्वविद्यालय से एम.ए. हिन्दी करने के बाद उन्होंने कोटा विश्वविद्यालय से एम.ए व “जनसंचार एवं पत्रकारिता” में पी.एच.डी की और शिक्षा के साथ ही “भारतीय अनुवाद परिषद्” बंगाली मार्केट से अनुवाद का स्नातकोत्तर डिप्लोमा किया। उन्होंने सन 1997 से लेकर 2004 तक दिल्ली दूरदर्शन के साहित्यिक कार्यक्रम “पत्रिका” की संचालिका के रूप में कार्य करते हुए 2000-2003 तक दिल्ली विश्वविद्यालय के खालसा कालेज में “ जनसंचार व पत्रकारिता “विषय की प्राध्यापिका पद पर सेवाएं दीं। सन 2003 में प्रवासी भारतीय डॉ दिनेश नंनन पांडे से विवाह के बाद वे सन 2004 से स्थाई रूप से नीदरलैंड में रह रही हैं।
Updated on:
13 Jun 2024 05:55 pm
Published on:
13 Jun 2024 05:29 pm
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