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भारत में पहली बार फॉसिल फ्यूल ऊर्जा उत्पादन में आई कमी, क्लीन एनर्जी बनी टर्निंग प्वाइंट

भारत में पहली बार ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में बड़ा टर्निंग प्वाइंट आया है। भारत में कोयले से चलने वाले संयंत्रों से बिजली उत्पादन में गिरावट देखी गई है। ठीक इसके विपरीत भारत में रिन्यूएबल स्रोतों से बिजली का उत्पादन बढ़ा है।

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भारत

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Vinay Shakya

Apr 22, 2026

Electricity Generation from Solar Panels

सोलर प्लेट से बिजली उत्पादन (Photo- IANS)

साल 2025 विश्व के ऊर्जा इतिहास में एक ऐतिहासिक 'टर्निंग पॉइंट' के रूप में दर्ज हो गया है। वैश्विक ऊर्जा थिंक टैंक 'एम्बर' की नवीनतम 'ग्लोबल इलेक्ट्रिसिटी रिव्यू' रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर जीवाश्म ईंधन से बिजली उत्पादन में दुर्लभ गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन में आई इस गिरावट के पीछे दुनिया के सबसे बड़े (चीन) और तीसरे सबसे बड़े (भारत) जीवाश्म बिजली उत्पादकों का ऐतिहासिक प्रदर्शन है।

भारत और चीन में पहली बार फॉसिल फ्यूल उत्पादन घटा

साल 2025 इस सदी का पहला ऐसा वर्ष रहा जब दोनों देशों में जीवाश्म ईंधन आधारित उत्पादन में एक साथ कमी आई है। चीन में फॉसिल फ्यूल उत्पादन में 56 टेरावॉट (0.9%) की गिरावट दर्ज की गई, जो 2015 के बाद पहली कमी है। वहीं, भारत में जीवाश्म ईंधन आधारित उत्पादन में 52 टेरावाट (3.3%) की कमी आई। इस सदी में ऐसा केवल 5वीं बार हुआ है। महामारी के बाद पहली बार वैश्विक स्तर पर जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन में वार्षिक बढ़त देखने को नहीं मिली है।

सौर ऊर्जा क्षमता विस्तार में भारत ने अमेरिका को पछाड़ा

भारत के लिए 2025 उपलब्धियों भरा रहा। देश ने पहली बार सौर ऊर्जा क्षमता के विस्तार में अमरीका को भी पीछे छोड़ दिया। भारत ने साल 2025 में लगभग 38 गीगावॉट की नई सौर क्षमता जोड़ी, जबकि अमरीका में यह आंकड़ा 33 गीगावाट रहा। इसके अलावा 6.3 गीगावाट पवन ऊर्जा और 4 गीगावाट जलविद्युत क्षमता भी जोड़ी गई, जिससे कुल रिन्यूएबल एडिशन 48 गीगावाट के पार पहुंच गया है।

भारत में रिन्यूएबल स्रोतों से बिलली का उत्पादन बढ़ा

भारत में साल 2025 में रिन्यूएबल स्रोतों ने 98 टेरावॉट-आर अतिरिक्त बिजली का उत्पादन हुआ, जबकि देश की कुल मांग में केवल 49 टेरावॉट-आर की ही वृद्धि हुई। अच्छे मानसून और अपेक्षाकृत कम गर्मी के कारण बिजली की मांग सीमित रही, जिसे स्वच्छ ऊर्जा ने न केवल पूरी तरह कवर किया, बल्कि कोयला आधारित उत्पादन पर दबाव भी कम कर दिया। CREA और कार्बन ब्रीफ के अध्ययन भी पुष्टि करते हैं कि आधी सदी में पहली बार (महामारी काल को छोड़कर) भारत में कोयले से चलने वाले बिजली उत्पादन में वार्षिक गिरावट देखी गई है।