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भारत में गिरती प्रजनन दर पर एलन मस्क ने जताई चिंता

भारत में गिरती प्रजनन दर पर दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क ने प्रतिक्रिया जाहिर की है। क्या कहा एलन ने? आइए जानते हैं।
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भारत

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Tanay Mishra

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Updated: 7 Jun 2026, 1:32 PM IST

Elon Musk

एलन मस्क (File Photo)

दुनियाभर में गिरती प्रजनन दर चिंता का विषय है। कई देशों में प्रजनन दर (Fertility Rate) कम होने से युवा जनसंख्या के मुकाबले बुज़ुर्गों की संख्या बढ़ रही है। दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क (Elon Musk) अक्सर ही इस पर चिंता जाहिर करते हैं। मस्क का मानना है कि गिरती प्रजनन दर और घटती जनसंख्या चिंताजनक है। भारत (India) में गिरती प्रजनन दर पर एक रिपोर्ट सामने आई है, जिस पर मस्क ने चिंता जताई है।

प्रतिस्थापन दर से नीचे गिरी भारत की प्रजनन दर

हाल ही में आई एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में प्रजनन दर इतिहास में पहली बार प्रतिस्थापन स्तर से नीचे गिर गई है, जो सिर्फ एक दशक में 2.3 से घटकर 1.9 हो गई है। यह रिपोर्ट 2024 के आंकड़ों पर आधारित है। दिल्ली की प्रजनन दर अब 1.2 है, जो फिनलैंड से भी कम है। इस रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका की प्रजनन दर 1.6 है। राजस्थान की प्रजनन दर 2.3, उत्तर प्रदेश की प्रजनन दर 2.6 और बिहार की प्रजनन दर 2.9 है। सोशल मीडिया पर इस रिपोर्ट को रिपोस्ट करते हुए मस्क ने चिंता जताते हुए लिखा, "भारत की जन्म दर प्रतिस्थापन स्तर से नीचे गिर गई है। उच्चतम शिक्षित लोगों में भारत की जन्म दर कई वर्षों पहले ही प्रतिस्थापन स्तर से नीचे गिर गई थी।"

क्या है प्रजनन प्रतिस्थापन स्तर?

प्रजनन प्रतिस्थापन स्तर वह औसत संख्या है जिसमें एक महिला को बच्चों को जन्म देना चाहिए जिससे एक पीढ़ी अपनी जगह दूसरी पीढ़ी को पूरी तरह प्रतिस्थापित कर सके। विकसित देशों में यह स्तर 2.1 बच्चे प्रति महिला माना जाता है। इसमें 0.1 अतिरिक्त इसलिए जोड़ा जाता है क्योंकि कुछ बच्चे छोटी उम्र में मर जाते हैं और जन्म के समय लड़कों की संख्या लड़कियों से थोड़ी ज़्यादा होती है।

प्रजनन दर का प्रतिस्थापन स्तर से नीचे गिरना क्यों है चिंताजनक?

जब प्रजनन दर प्रतिस्थापन स्तर से नीचे चली जाती है, तो लंबे समय में आबादी घटने लगती है। इससे देश की जनसंख्या में युवाओं की संख्या कम होती है और बुज़ुर्गों की संख्या बढ़ती है। ऐसा होने पर कार्यबल में कमी आती है। काम करने वाले लोगों की संख्या कम होती है, जिससे अर्थव्यवस्था को नुकसान होता है। देश में उत्पादकता और नवाचार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। सामाजिक सुरक्षा पर बोझ बढ़ता है, क्योंकि टैक्स देने वालों की संख्या कम होती है, लेकिन पेंशन और हेल्थकेयर पर खर्च बढ़ता है। आर्थिक मंदी का खतरा बढ़ता है और देश की वैश्विक ताकत भी कम होती है।