
मालदीव के राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेने वाले मोहम्मद मुइज्जू ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करेंगे कि 'उनकी अपनी धरती पर कोई विदेशी सैन्य उपस्थिति न हो।' उन्होंने शपथग्रहण समारोह में भाग लेने भारत से आए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के साथ बैठक के दौरान औपचारिक रूप से भारत के सैन्य कर्मियों को वापस लेने का अनुरोध किया। अपने चुनाव अभियान के दौरान मोहम्मद मुइज्जू ने बार-बार इसका संकेत दिया था कि भारतीय सैन्य टुकड़ियों की वापसी उन मुद्दों में से एक है। आखिर क्या है इसकी वजह...
मालदीव में कितने भारतीय सैनिक?
द्वीप देश में भारत के केवल 70 सैनिक हैं। ये भारत प्रायोजित रडार और निगरानी विमान संचालित करते हैं। इस क्षेत्र में भारतीय युद्धपोत देश के विशेष आर्थिक क्षेत्र में गश्त करने में मदद करते हैं। मुइज्जू ने कई आपातकालीन चिकित्सा निकासी में दो भारतीय हेलिकॉप्टरों की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार भी किया है। भारतीय सैनिकों का यह छोटा समूह कई वर्षों से मालदीव में तैनात है। फिलहाल, दोनों पक्ष भारतीय सैन्य प्लेटफार्मों का उपयोग जारी रखने के लिए 'व्यावहारिक समाधान' निकालने पर सहमत हुए हैं।
तो क्या चीन के सैनिक तैनात होंगे?
लगभग 5 लाख की आबादी वाला मालदीव हिंद महासागर क्षेत्र के बढ़ते रणनीतिक महत्व और भारत व चीन के बीच सीमा तनाव में महत्तवपूर्ण भू-राजनीतिक हॉटस्पॉट बन गया है। इसे ध्यान में रखते हुए चीन और भारत, दोनों ही उदारतापूर्वक यहां निवेश करते आए हैं। मुइज्जू ने सुरक्षा के आधार पर मालदीव से भारतीय सैनिकों की वापसी पर जोर दिया है। उन्होंने यह भी कहा है कि इसका मतलब यह नहीं है कि वे भारतीय सेना के स्थान पर चीनी सैनिकों को तैनात करेंगे।
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चीन के साथ संबंध मजबूत करना मकसद?
मुइज्जू का कहना है कि विदेशी सैनिकों को मालदीव की धरती से हटाने का वादा करके ही वे सत्ता में आए हैं। भारत और चीन दोनों के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं, उन्होंने कहा है कि द्वीप राष्ट्र 'भूराजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में उलझने के लिए बहुत छोटा है।' हालांकि, मुइज्जू ने एक साल कहा था कि वे जीते तो चीन के साथ संबंध मजबूत करना चाहेंगे। चीन समर्थक माने जाने वाले मुइज्जू, भारत समर्थक माने जाने वाले इब्राहिम सोलिह को हरा कर सत्ता में आए हैं?
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Published on:
20 Nov 2023 08:05 am
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