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NATO मेंबर बनने के लिए फिनलैंड है तैयार, बिना स्वीडन के बढ़ेगा आगे

Finland Preparing To Join Nato: पिछले कुछ साल से फिनलैंड के नाटो का मेंबर बनने की चर्चाएं चल रही हैं। दोनों पक्ष भी इसके लिए पूरी तरह से तैयार हैं। हाल ही में फिनलैंड ने नाटो का मेंबर बनने के बारे में एक बड़ी बात कही है। क्या? आइए जानते हैं।

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Finland preparing to join NATO even without Sweden

यूरोपीय देश फिनलैंड (Finland) के काफी समय से नाटो (Nato - North Atlantic Treaty Organization) का मेंबर बनने की बात चल रही है। नाटो 30 देशों का ग्रुप है, जिसमें 28 यूरोपीय देश और 2 नॉर्थ अमरीकी देश शामिल हैं। नाटो में शामिल जितने भी मेंबर देश हैं, सैन्य मामलों में एक-दूसरे की मदद करते हैं। इसी वजह से फिनलैंड भी काफी समय से नाटो में शामिल होना चाहता है। पहले चर्चा थी कि फिनलैंड और स्वीडन (Sweden) दोनों एक साथ नाटो में शामिल होंगे। दोनों पड़ोसी देश हैं और इनके एक साथ नाटो में शामिल होने की बात काफी समय से चल रही थी। पर हाल ही में आई रिपोर्ट के अनुसार अब फिनलैंड बिना स्वीडन के भी नाटो में शामिल होने के लिए तैयार है।

फिनलैंड की संसद में हुई डोमेस्टिक प्रोसेस शुरू

हाल ही में फिनलैंड की संसद में नाटो में शामिल होने की प्रोसेस शुरू हो गई है। फिनलैंड ने स्वीडन के साथ ही नाटो में शामिल होने के लिए अप्लाई किया था, पर अब फिनलैंड बिना स्वीडन के ही नाटो का मेंबर बनने के लिए तैयार है। रिपोर्ट के अनुसार फिनलैंड अब अपनी मेंबरशिप बिड के लिए आखिरी सहमति का इंतज़ार कर रहा है। फिनलैंड के राष्ट्रपति सौली नीनिस्टो (Sauli Niinistö) ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तुर्की और हंगरी की सहमति मिलते ही उनके नाटो का मेंबर बनने की राह आसान हो जाएगी।


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स्वीडन को क्यों लग रहा है समय?


स्वीडन भी फिनलैंड के साथ ही नाटो का मेंबर बनना चाहता है, पर तुर्की इस बात पर अपनी सहमति नहीं दे रहा है। इस वजह से स्वीडन को इसमें समय लग रहा है। तुर्की को पहले फिनलैंड के भी मेंबर बनने से ऐतराज़ था, पर अब तुर्की को इससे कोई ऐतराज़ नहीं है। इस वजह से फिनलैंड की नाटो में शामिल होने की राह आसान हो गई है।

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद नाटो में शामिल होने की मांग हुई तेज़

पिछले साल 24 फरवरी को रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद फिनलैंड और स्वीडन के नाटो में शामिल होने की मांग तेज़ हो गई। दोनों ही देशों की बॉर्डर रूस से लगती है। ऐसे में रूस से टकराव की आशंका के चलते और इससे बचाव के लिए फिनलैंड और स्वीडन दोनों ही जल्द से जल्द नाटो में शामिल होना चाहते हैं।

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