31 मई 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

होर्मुज संकट से दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं में आया भूचाल, एक्सपर्ट्स ने दे दी चेतावनी

होर्मुज संकट को लेकर दुनिया भर में संकट के बादल छाए हुए हैं। एक्सपर्ट्स ने भी इस पर चेतावनी दे दी है। जानिए, अमेरिकी मीडिया इस पर क्या रिपोर्ट कर रहा है।

2 min read
Google source verification
strategic Hormuz Strait, highlighting Iran's control, major shipping lanes, and global oil transit routes during the Iran-US ceasefire.

होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता जहाज। (फोटो- IANS)

Iran-Israel War: ईरान-इजरायल जंग के बीच होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की वजह से दुनिया भर में आर्थिक झटका लगा है। ईरान और अमेरिका संघर्ष की वजह से होर्मुज के रास्ते से एनर्जी मार्केट सप्लाई में रुकावट आ गई है। द वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, ईरान युद्ध का ग्लोबल एनर्जी फ्लो पर असर बढ़ रहा है, होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से कॉन्टिनेंट्स में तेल, गैस और जरूरी सप्लाई चेन में रुकावट आ रही है।

होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता है 20 फीसदी तेल

होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया का लगभग 20 फीसदी तेल गुजरता है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष में अब यह संकट का केंद्र बन गया है। ईरान ने अमेरिका-इजरायली हमलों के जवाब में समुद्री ट्रैफिक पर रोक लगा दी है। इस रुकावट का असर पहले से ही ग्लोबल मार्केट में दिख रहा है।

एनर्जी कीमतें लगातार बढ़ रही

द वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, एनर्जी की कीमतें बढ़ रही हैं, सप्लाई चेन टाइट हो रही हैं और सरकारें लंबे समय तक कमी के लिए तैयारी कर रही हैं। विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि अगर लड़ाई जारी रही तो इसका अर्थव्यवस्था पर लंबा असर हो सकता है। ऊर्जा निर्यात पर बहुत ज्यादा निर्भर भारत ने सप्लाई पक्की करने के लिए तेजी से कदम उठाए हैं।

सालों बाद भारत ने ईरान से खरीदी तेल

इस मामले में CNN ने रिपोर्ट किया है कि भारत ने सालों बाद पहली बार ईरान से तेल खरीदा है। भारत अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते लंबे समय से ईरानी कच्चे तेल से दूरी बनाए हुए था। अमेरिकी मीडिया एजेंसी ने इसे बड़ा बदलाव करार दिया है। अमेरिकी मीडिया ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भारत ने ईरान से 44,000 मीट्रिक टन लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) भी इंपोर्ट की है, जिसकी शिपमेंट मैंगलोर पोर्ट पर पहुंच गई है।

द वाशिंगटन पोस्ट के आकलन के मुताबिक, अगर यह रुकावट तीन महीने तक रहती है, तो तेल की कीमतें 170 प्रति बैरल तक बढ़ सकती हैं, जबकि छह महीने तक चलने वाला लंबा टकराव वैश्विक अर्थव्यवस्था को मंदी में धकेल सकता है। विशेषज्ञों के मुताबकि सप्लाई में रुकावट सिर्फ एनर्जी तक ही सीमित नहीं हैं। इस रुकावट का असर फर्टिलाइजर शिपमेंट,पेट्रोकेमिकल्स और इंडस्ट्रियल इनपुट पर भी पड़ रहा है, जिसकी कमी पहले ही एशिया में दिख रही है और आने वाले हफ्तों में इसके यूरोप और अमेरिका तक फैलने की उम्मीद है।