
Ship in Strait of Hormuz (file Photo - ANI)
Hormuz Strait Crisis: पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध के हालातों ने पूरी दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद जवाबी कार्रवाई का सिलसिला जारी है, जिसका सीधा असर अब दुनिया की 'एनर्जी लाइफलाइन' कहे जाने वाले होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) पर पड़ा है। अमेरिकी बैंक जेपी मॉर्गन के मुख्य अर्थशास्त्री ब्रूस कासमैन ने एक चेतावनी जारी की है जिसने वैश्विक बाजारों में खलबली मचा दी है। ब्रिटिश अखबार 'द टाइम्स' के अनुसार, कासमैन का मानना है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट का मार्ग एक और महीने तक बंद रहता है, तो कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू सकती हैं।
कासमैन ने स्पष्ट किया, 'अगर यह मार्ग अगले एक महीने तक बाधित रहा, तो ऊर्जा की कीमतें अनियंत्रित हो जाएंगी। औद्योगिक उपभोक्ताओं को न केवल भारी कीमतों का बोझ उठाना होगा, बल्कि ऊर्जा की भारी किल्लत का भी सामना करना पड़ सकता है।'
वर्तमान संकट की शुरुआत 28 फरवरी को हुई, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान की राजधानी तेहरान सहित देश के विभिन्न महत्वपूर्ण ठिकानों पर व्यापक हवाई हमले किए थे। इन हमलों में ना केवल बुनियादी ढांचे को भारी क्षति हुई, बल्कि बड़ी संख्या में नागरिक भी हताहत हुए।
इस सैन्य कार्रवाई के जवाब में ईरान ने इजरायली क्षेत्र के साथ-साथ पश्चिम एशिया में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर भी जवाबी हमले शुरू कर दिए हैं। दोनों पक्षों के बीच बढ़ती इस शत्रुता ने फारस की खाड़ी के मुहाने पर स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को युद्ध के केंद्र में ला खड़ा किया है।
वैश्विक बाजार के लिए यह चिंता का विषय इसलिए है क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया भर में तेल और तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति का सबसे प्रमुख मार्ग है। वर्तमान में इस मार्ग से होने वाला नौपरिवहन प्रभावी रूप से ठप हो गया है, जिसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की बढ़ती कीमतों के रूप में दिखाई दे रहा है। यदि यह गतिरोध जल्द समाप्त नहीं हुआ, तो दुनिया भर के देशों को न केवल रिकॉर्ड तोड़ महंगाई का सामना करना होगा, बल्कि ऊर्जा की कमी के कारण वैश्विक औद्योगिक चक्र भी बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।
Published on:
31 Mar 2026 11:24 pm
बड़ी खबरें
View Allविदेश
ट्रेंडिंग
