
Houthis Aden Government Headquarters Strike: अदन में बड़ा हमला! सरकारी मुख्यालय पर हूतियों ने बोला धावा, प्रधानमंत्री बाल-बाल बचे (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)
Houthis Aden Government Headquarters Strike: यमन की दक्षिणी नगरी अदन में अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के मुख्यालय पर हुए हमले ने एक बार फिर पूरे क्षेत्र को हिला दिया है। हूती विद्रोहियों ने आधिकारिक बयान जारी कर इस हमले की जिम्मेदारी स्वीकार कर ली है। उन्होंने दावा किया कि वहां सऊदी का युद्ध संचालन केंद्र था। प्रधानमंत्री सुरक्षित रहे और उन्होंने इसे राज्य व्यवस्था को तोड़ने की साजिश करार दिया। यह घटना सिर्फ एक हमला नहीं, बल्कि दोनों पक्षों के बीच चल रहे जंग और शब्दों के युद्ध को और तेज कर रही है।
अनसार अल्लाह हूती संगठन ने अदन स्थित सरकारी मुख्यालय पर हुए हमले की जिम्मेदारी खुलेआम स्वीकार कर ली है। हूती सैन्य प्रवक्ता यह्या सरी ने बयान में कहा कि उस इमारत में सऊदी अरब का युद्ध संचालन कक्ष चल रहा था। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यमन की धरती पर सऊदी की कोई भी सैन्य या आर्थिक मौजूदगी अब उनके सशस्त्र बलों का जायज निशाना बनेगी।
आपको बता दें कि इस हमले में यमन के प्रधानमंत्री शाया अल-ज़िंदानी सुरक्षित हैं उन्होंने सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोलते हुए अनसार अल्लाह को आतंकी समूह बताया। उन्होंने कहा कि यह हमला राज्य की संस्थाओं को ठप करने और 2015 में हुए आतंकी तख्तापलट को पलटने की कोशिशों को रोकने के लिए किया गया। प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि यमन की सैन्य कार्रवाई रुकने वाली नहीं है। वे हूती नियंत्रण से देश का हर वर्ग इंच आजाद करने तक लड़ते रहेंगे। इसमें राजधानी सना भी शामिल है, जो 2015 में हूतियों के कब्जे में चली गई थी।
दोनों पक्ष सिर्फ मैदान में नहीं, बल्कि बयानों के जरिए भी एक-दूसरे को घेर रहे हैं। हूती अपना हमला जायज ठहरा रहे हैं, तो यमन सरकार इसे आतंक का नाम दे रही है। हर तरफ से यह संदेश साफ है कि लड़ाई तब तक चलेगी जब तक उनके लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते।
यमन का गृहयुद्ध अब एक दशक से ज्यादा पुराना हो चुका है। 2014 में हूतियों ने राजधानी पर कब्जा किया था, जिसके बाद सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने सैन्य हस्तक्षेप किया। इस संघर्ष में हजारों लोग मारे जा चुके हैं और लाखों विस्थापित हुए हैं। लाल सागर के व्यापारिक मार्ग भी इस तनाव से प्रभावित होते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हूती हमलों और जवाबी कार्रवाइयों का सिलसिला अगर नहीं रुका तो क्षेत्रीय सुरक्षा और भी बिगड़ सकती है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी कहानी गढ़ रहे हैं और जनता के बीच अपना पक्ष मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय बार-बार शांति की अपील करता रहा है, लेकिन जमीन पर हालात उल्टे ही जा रहे हैं। अदन जैसे शहर, जो अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाते थे, अब फिर निशाने पर हैं। यह हमला साबित करता है कि यमन में युद्ध अभी खत्म होने वाला नहीं है।
Updated on:
16 Oct 2026 06:50 am
Published on:
16 Oct 2026 06:21 am
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
