
अरब क्रांति के दस वर्ष
कई देशों की सरकार उखाड़ फेंकने वाली अरब क्रांति के दस वर्ष बाद भी मध्य-पूर्व के हालात ज्यादा नहीं सुधरे, हालांकि कुछ बदलाव जरूर नजर आए हैं। दिसंबर 2010 में ट्यूनीशिया के स्ट्रीट वेंडर मोहम्मद बुआजिजी ने सिदी बुआजिद कस्बे में सरकारी नीतियों के खिलाफ आग लगा ली थी। इसके बाद विरोध की आग पूरे अरब में फैल गई। मध्य-पूर्व की कई सरकारों को जाना पड़ा। जानिए इस क्रांति के बाद इन देशों में क्या-क्या बदलाव हुए।
1. लोकतंत्र
चरमपंथी दल पूर्व में धर्म निरपेक्ष रहे ट्यूनीशिया और मिस्र में सत्ता पर काबिज हो गए। इस बीच गहरे सांप्रदायिक विभाजन ने बहरीन, सीरिया और यमन में सरकार विरोधी आंदोलन को जन्म दिया। ट्यूनीशिया में स्थाई लोकतंत्र कायम हुआ, जबकि लीबिया, सीरिया और यमन गृहयुद्ध की आग में झुलस रहे हैं।
2. इंटरनेट पर पाबंदी
विद्रोह से पहले की तुलना में आज ज्यादातर देशों में प्रेस की स्वतंत्रता बदतर है। इंटरनेट और सोशल मीडिया को युवाओं ने अरब क्रांति का हथियार बनाया। लेकिन मिस्र ने इंटरनेट को प्रतिबंधित करके सरकार विरोधी खेमेबाजी को खत्म किया। केवल ट्यूनीशिया में इंटरनेट की स्वतंत्रता बढ़ी है।
3. महिला सशक्तीकरण
लैंगिक समानता अरब क्रांति की प्राथमिकता में नहीं थी, खतरों के बावजूद महिलाओं ने इन विरोध प्रदर्शनों में बढ़-चढकऱ हिस्सा लिया। पिछले कुछ देशों की राजनीतिक भागीदारी बढ़ी है, लेकिन महिलाओं की स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं हुआ। हालांकि मिस्र अैर ट्यूनीशिया में महिलाएं अत्याचारों के खिलाफ मुखर हुई हैं।
4. जीवन स्तर
क्रांति के बाद किसी भी देश के जीवन स्तर में सुधार नहीं हुआ। तेल की कीमतों में गिरावट से कई देश वित्तीय परेशानी का सामना कर रहे हैं। भ्रष्टाचार और ग्रामीण इलाकों में बढ़ रही गरीबी ने लोगों का जीवन दूभर कर दिया है।
5. युवाओं में असंतोष
सरकारी भ्रष्टाचार और आर्थिक अवसरों में कमी से निराश युवाओं ने कई बार विद्रोह किया। मध्य-पूर्व के देशों में करीब 30 फीसदी युवा बेरोजगार हैं, जो दुनिया में सबसे अधिक हैं। कई देशों में फिर से विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए।
6. विस्थापन
विद्रोह और गृह युद्ध के कारण लीबिया, सीरिया और यमन में बड़े पैमाने पर लोग देश छोड़ गए। अकेले सीरिया में 50 लाख से अधिक देश छोड़ गए, जबकि 60 लाख से अधिक देश में ही बेघर हैं। कई मामलों में विदेशी सैन्य हस्तक्षेप ने हिंसा के आकार को और बढ़ा दिया। जैसे सीरिया में रूसी सेना से विद्रोहियों के टकराव से हालात बिगड़े।
क्रांति के बाद वर्षों से जमे तानाशाहों को छोडऩी पड़ी कुर्सी
अरब क्रांति के बाद ट्यूनीशिया में 23 वर्ष से जमे तानाशाह जिने अल आबेदीन को देश छोडकऱ भागना पड़ा। मिस्र में 18 दिन चले आंदोलन के बाद 2011 में राष्ट्रपति होस्नी मुबारक को सत्ता छोडऩी पड़ी। 2012 में यमन में अली अब्दुल्लाह का तीन दशकों का शासन खत्म हुआ। बाद में यहां हूती विद्रोहियों ने बड़े हिस्से पर कब्जा जमा लिया। सीरिया में असद को हटाने के लिए भी प्रदर्शन होते रहे, लेकिन रूस, ईरान और लेबनान की सेना उसका समर्थन कर रही है।
आंकड़ों पर एक नजर
* 2010 में ट्यूनीशिया से शुरू हुई अरब क्रांति ने कई सरकारों को हटने के लिए मजबूर कर दिया।
* 23 वर्ष से ट्यूनीशिया की सत्ता पर काबिज अल आबेदीन बेन अली को देश छोडऩा भागना पड़ा।
* 30 फीसदी युवा बेरोजगार हैं मध्य-पूर्व में, जो विश्व में सर्वाधिक हैं।
Published on:
07 Jan 2021 02:03 am
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