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फ्यूल क्राइसिस के बीच भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ, श्रीलंका के राष्ट्रपति बोले- थैंक्यू इंडिया

श्रीलंका में फ्यूल क्राइसिस के बीच भारत ने मदद का हाथ बढ़ाते हुए ईंधन की बड़ी खेप भेजी है। इसे लेकर श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने शुक्रिया अदा किया है। पढ़ें पूरी खबर...

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पीएम नरेंद्र मोदी और श्रीलंका के राष्ट्रपति दिसानायके (फोटो-IANS)

Iran Israel War: ईरान इजरायल जंग के चलते वैश्विक स्तर पर ईंधन आपूर्ति बाधित हो गई है। भारत के पड़ोस में कई देश फ्यूल क्राइसिस से जूझ रहे हैं। ऐसे में भारत ने अपने पड़ोसियों के लिए मदद का हाथ आगे बढ़ाया है। बांग्लादेश के बाद अब भारत ने श्रीलंका को भारी मात्रा में ईंधन भेजा है। भारत सरकार के इस कदम पर श्रीलंकाई राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानयाके ने आभार जताया है।

दिसानायके और पीएम मोदी के बीच हुई बातचीत

श्रीलंकाई राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानयाके ने कहा कि कुछ दिन पहले ही भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी बात हुई थी। इस दौरान श्रीलंका में फ्यूल क्राइसिस को लेकर बातचीत हुई थी। इस बातचीत के बाद भारत ने तुरंत मदद का हाथ आगे बढ़ाते हुए 38,000 एमटी फ्यूल भेजा। इसलिए मैं भारत सरकार का शुक्रगुजार हूं।

'भारत ने पड़ोसी धर्म पूरी शिद्दत से निभाया'

दिसानायके ने मौजूदा संकट काल में विदेश मंत्री एस जयशंकर के पूर्ण सहयोग का भी जिक्र करते हुए उनका धन्यवाद किया है। पूर्व मंत्री और श्रीलंका पोदुजना पेरामुना (एसएलपीपी) के सांसद नमल राजपक्षे ने भी एक्स पोस्ट के जरिए भारत को शुक्रिया कहा। उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा की तरह अपना पड़ोसी धर्म पूरी शिद्दत से निभाया।

38,000 एमटी फ्यूल श्रीलंका भेजा

उन्होंने भी एक्स पर लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के लोगों ने एक बार फिर श्रीलंका को 38,000 एमटी पेट्रोलियम की समय पर शिपमेंट के जरिए 'नेबरहुड फर्स्ट' पॉलिसी को बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा संकट के समय श्रीलंका के लिए सबसे पहले खड़ा रहा है, जरूरी सप्लाई से लेकर आर्थिक मदद तक, जो उसकी नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी की सच्ची झलक है। एक इलाके के तौर पर, यह जरूरी है कि देश इलाके की बेहतरी के लिए स्ट्रेटेजिक पार्टनर के तौर पर मिलकर काम करें।

इसके साथ ही राजपक्षे ने भारत सरकार के विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क जैसे मॉडल पर विचार करने की सलाह सरकार को दी। उन्होंने एक्स पोस्ट में कहा कि भारत ने एक्साइज ड्यूटी तुरंत कीमतें कम करने के लिए नहीं, बल्कि मार्केट को स्थिर करने और ग्लोबल तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव के दौरान कीमतों में और बढ़ोतरी को रोकने के लिए कम की है।