
ईरान में स्थित चाबहार पोर्ट, जो भारत को मध्य एशिया और यूरोप से जोड़ता है। (Photo-IANS)
Chabahar Port India: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों के खिलाफ सख्त एक्शन लेने की धमकियां दे रहे हैं। अमेरिका का कहना है कि वह तेहरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाएगा। ट्रंप की धमकियों के बाद दावा किया जा रहा है कि भारत भी ईरान के साथ व्यापार कम कर सकता है और चाबहार पोर्ट परियोजना से पीछे हट सकता है। बता दें कि 2025 सितंबर में, अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे। हालांकि अमेरिका ने चाबहार पोर्ट परियोजना पर भारत को 6 महीने की छूट दी थी, जो 26 अप्रैल को समाप्त होने जा रही है।
हालांकि इन अटकलों के बाद, भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से एक बयान जारी किया गया है। मंत्रालय ने कहा है कि भारत चाबहार पोर्ट के संदर्भ में अमेरिका के साथ संपर्क में है और निरंतर बातचीत कर रहा है। भारत चाबहार पोर्ट पर अपना काम जारी रखने के लिए अमेरिका द्वारा लगाए गए अल्पकालिक प्रतिबंधों में छूट लागू करने के लिए जोर दे रहा है।
चाबहार पोर्ट परियोजना विभिन्न देशों के बीच व्यापार करने के साथ समय बचाने के लिए भी एक महत्वपूर्ण परियोजना है। चाबहार पोर्ट के कारण अलग-अलग देशों के बीच सामान जल्दी और आसानी से भेजा जा सकता है। चाबहार पोर्ट भारत, ईरान, अफगानिस्तान, आर्मेनिया, अजरबैजान, रूस, मध्य एशिया और यूरोप के बीच एक व्यापारिक कॉरिडोर बनाता है। अनुमान है कि इस कॉरिडोर के माध्यम से स्वेज नहर की तुलना में 15 दिन कम लगेंगे।
भारत के लिए चाबहार पोर्ट व्यापार के लिए ही नहीं बल्कि रणनीतिक रूप से भी बेहद जरूरी है। चाबहार पोर्ट भारत को हिंद महासागर तक पहुंच प्रदान करता है। साथ ही, यह पोर्ट पाकिस्तान के मुंह पर एक तगड़ा जवाब भी है, जो पाकिस्तान को क्षेत्र में दरकिनार करता है। यह पोर्ट पाकिस्तान को अलग-थलग करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग उपलब्ध कराता है। बता दें कि पाकिस्तान कई बार भारत के अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक के जमीनी व्यापारिक मार्गों में बाधा डाल चुका है। इसलिए भारत के लिए चाबहार पोर्ट एक सुरक्षित पश्चिमी व्यापारिक मार्ग हो सकता है।
अमेरिका द्वारा चाबहार पोर्ट पर भारत को दी गई छूट खत्म होने जा रही है। इसके बाद कई अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। अमेरिका और भारत के बीच चाबहार पोर्ट पर चल रही बातचीत पर जानकारों का मानना है कि भारत लगातार अमेरिका के साथ बातचीत कर रहा है और संभावित रास्ते तलाश रहा है। भारत के पास चाबहार से पीछे हटने का कोई विकल्प नहीं है। यह पोर्ट भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। साथ ही, यह दावा किया जा रहा है कि भारत अमेरिका को यह दिखाना चाहता है कि नई दिल्ली प्रतिबंधों की शर्तों पर काम करेगी। इसलिए बातचीत थोड़ी जटिल है।
बता दें, घटना से परिचित लोगों का कहना है कि भारत ने ईरान के चाबहार पोर्ट को विकसित करने के लिए करीब 120 मिलियन डॉलर देने का वादा किया था। अब भारत चाहता है कि इस परियोजना में उसकी सीधी भागीदारी खत्म हो जाए। इसलिए भारत 120 मिलियन डॉलर ईरान को सौंपने की प्रक्रिया में है, ताकि आगे चलकर भारत पर कोई जिम्मेदारी या जोखिम न रहे।
Updated on:
17 Jan 2026 04:43 pm
Published on:
17 Jan 2026 04:43 pm
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