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अल्बानिया, फ्रांस, इटली के बाद अब इंडोनेशिया में प्रदर्शन, छात्रों ने राष्ट्रपति प्रबोवो सरकार की नीतियों पर सवाल

अल्बानिया, फ्रांस और इटली के बाद अब इंडोनेशिया में भी प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। महंगाई और जंगल की आग पर छात्रों ने प्रबोवो सरकार को घेरा।
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Indonesian student protests

इंडोनेशिया में प्रदर्शन (फोटो- X@ICR360)

दुनिया के हर हिस्से में इन दिनों विरोध की चिंगारी जल रही है। पश्चिम में फ्रांस, इटली और अल्बानिया से लेकर पूर्व में इंडोनेशिया भी अब विरोध प्रदर्शन की आग का ताप महसूस कर रहा है। इंडोनेशिया में बढ़ती महंगाई, भारी आर्थिक दबाव और जंगल की आग को लेकर छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों ने राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो सरकार के दो साल पूरे होने के मौके पर मंगलवार को जकार्ता, योग्यकर्ता और पश्चिम जवाब के बांडुंग में प्रदर्शन हुए।

द जकार्ता ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि इंडोनेशिया में बढ़ती महंगाई, आर्थिक दबाव को लेकर छात्र सड़कों पर हैं। इनमें छात्रों के साथ नागरिक संगठन भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने आर्थिक हालात, पर्यावरण को हो रहे नुकसान और नागरिक स्वतंत्रता पर चिंता जताई। अखबार ने लिखा कि जकार्ता में सैकड़ों विश्वविद्यालय छात्र तुगु तानी स्मारक के पास इकट्ठा हुए। उन्होंने महंगाई पर कदम उठाने और जंगल व पीटलैंड की आग से निपटने के सरकारी तरीके में सुधार की मांग की। दरअसल, आग से जहरीली धुंध फैल गई है, जिससे उड़ानें प्रभावित हुई हैं, स्कूल बंद करने पड़े हैं और लोगों की सेहत को लेकर चिंता बढ़ी है। जानकारी सामने आई है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के एक ट्रक में आग भी लगा दी।

क्या है इंडोनेशिया में प्रदर्शन कर रहे लोगों की मांगें ?

लोगों ने लंबे समय से जारी जंगल की आग को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की है। साथ ही, पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली कंपनियों पर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने सरकार से भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की मांग की है। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं सस्ती करने और अभिव्यक्ति की आजादी को मजबूत सुरक्षा मिलने की मांग की है।

अल नीनो के असर से बिगड़े हालात

इंडोनेशिया का प्रशासन सुमात्रा, कालीमंतन और पापुआ के जंगलों में लगी आग पर काबू पाने के लिए जूझ रहा है। अल नीनो के कारण इस बार शुष्क मौसम असामान्य रूप से गंभीर रहा है। धुंध पड़ोसी देश सिंगापुर और मलेशिया तक पहुंच गई है, जिससे क्षेत्र में वायु गुणवत्ता और जन स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ी है।

सरकार का पक्ष

प्रदर्शनों के बीच राष्ट्रपति के चीफ ऑफ स्टाफ और पुलिस जनरल लिस्त्यो सिगित प्रबोवो ने बताया कि राष्ट्रपति ने सोमवार को मर्देका पैलेस में सीमित बैठक की। इसमें जंगल और भूमि की आग से निपटने के प्रयास तेज करने पर चर्चा हुई। लिस्त्यो ने एक्स पर लिखा कि राष्ट्रपति ने हवाई अभियान मजबूत करने और सेना, पुलिस, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी, स्थानीय सरकारों व समुदायों के बीच तालमेल बेहतर करने के निर्देश दिए हैं।

राष्ट्रपति ने आग से जुड़े संदिग्ध 98 कॉरपोरेट मामलों की जांच तेज करने को भी कहा है। लिस्त्यो के मुताबिक, चीफ ऑफ स्टाफ का कार्यालय सरकारी कार्रवाई की निगरानी करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि कानूनी प्रक्रिया सबूतों पर आधारित हो और नियमों के अनुसार चले।

ग्रीनपीस का प्रदर्शन

इसी बीच ग्रीनपीस इंडोनेशिया के कार्यकर्ता मंगलवार को जकार्ता के होटल इंडोनेशिया चौराहे पर बने वेलकम मॉन्यूमेंट पर चढ़ गए। उन्होंने बड़े बैनर लहराकर जंगल की आग रोकने में सरकार की नाकामी का विरोध किया।