
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध। (फोटो: द वाशिंगटन पोस्ट)
Diplomatic Standoff : मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अब शांति की सुगबुगाहट तेज हो गई है, लेकिन समझौते की राह इतनी आसान नहीं दिख रही। (Iran US Conflict) ईरान ने युद्ध विराम और भविष्य के रिश्तों को लेकर 15 कड़ी शर्तें सामने रखी हैं, जो सीधे तौर पर अमेरिकी प्रशासन की नीतियों को चुनौती देती हैं। (Ceasefire Negotiations) डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा सत्ता में आने के बाद तेहरान और वाशिंगटन के बीच कूटनीतिक बिसात बिछ चुकी है, जहां दोनों पक्ष अपनी-अपनी साख बचाने की कोशिश में हैं। (Donald Trump Diplomacy) इस संभावित समझौते में परमाणु कार्यक्रम से लेकर आर्थिक प्रतिबंधों तक के पेचीदा मुद्दे शामिल हैं, जिन पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। (International Relations) यदि इन शर्तों पर सहमति नहीं बनी, तो क्षेत्र में संघर्ष और भी भयावह रूप ले सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल आपूर्ति पर गहरा संकट मंडरा रहा है। (Middle East Crisis)
ईरान की ओर से पेश की गई 15 शर्तों में सबसे प्रमुख मांग उस पर लगे सभी आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंधों को पूरी तरह से हटाना है। तेहरान का तर्क है कि जब तक उसकी अर्थव्यवस्था को खुली सांस लेने का मौका नहीं मिलेगा, तब तक कोई भी बातचीत बेमानी है। इसके साथ ही ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए जारी रखने की गारंटी मांगी है। ईरान चाहता है कि अमेरिका भविष्य में किसी भी समझौते से एकतरफा पीछे न हटने का लिखित आश्वासन दे, जैसा कि पूर्व में जेसीपीओए (JCPOA) के साथ हुआ था।
दूसरी ओर, डोनाल्ड ट्रंप का रुख हमेशा से ही ईरान के प्रति सख्त रहा है। जानकारों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन केवल उन्हीं शर्तों को स्वीकार करेगा जो इजरायल की सुरक्षा सुनिश्चित करती हों और ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर लगाम लगाती हों। ट्रंप के सामने चुनौती यह है कि वह बिना युद्ध किए ईरान को झुकने पर मजबूर करें। अमेरिका की मुख्य शर्त यह है कि ईरान क्षेत्र में सक्रिय अपने समर्थित समूहों (Proxy Groups) को फंडिंग देना बंद करे, जिसे ईरान अपनी सुरक्षा ढाल मानता है।
यदि यह समझौता सिरे चढ़ता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आ सकती है। प्रतिबंध हटने से ईरान का तेल बाजार में वापस आना दुनिया के लिए राहत भरी खबर होगी। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि 15 शर्तों में से कई ऐसी हैं जिन पर अमेरिका कभी सहमत नहीं होगा, जैसे कि मध्य पूर्व से अमेरिकी सेना की पूरी तरह वापसी। यही कारण है कि यह कूटनीतिक रस्साकशी आने वाले हफ्तों में और तेज होने वाली है।
वैश्विक विश्लेषकों का कहना है कि ईरान की शर्तें 'अधिकतम मांग' की रणनीति का हिस्सा हैं ताकि वे बातचीत की मेज पर मजबूत स्थिति में रहें। वहीं, इजरायल ने चेतावनी दी है कि किसी भी समझौते में ईरान की परमाणु क्षमता को पूरी तरह खत्म किया जाना चाहिए, अन्यथा यह केवल 'कुछ समय का विराम' होगा। आगामी जी-20 या संयुक्त राष्ट्र की बैठकों के दौरान इस मुद्दे पर पर्दे के पीछे की बातचीत (Backchannel Diplomacy) तेज होने की उम्मीद है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय जल्द ही ईरान के इस प्रस्ताव पर अपना आधिकारिक जवाब दे सकता है।
इस पूरे विवाद का एक महत्वपूर्ण हिस्सा चीन और रूस की भूमिका भी है। ईरान लगातार इन देशों के साथ अपने व्यापारिक और सैन्य संबंध मजबूत कर रहा है। यदि अमेरिका के साथ बातचीत विफल रहती है, तो ईरान 'ईस्ट पॉलिसी' की ओर पूरी तरह झुक सकता है, जो पश्चिमी देशों के लिए एक नया सिरदर्द होगा।
Updated on:
25 Mar 2026 05:53 pm
Published on:
25 Mar 2026 04:39 pm
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