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Patrika Analysis: युद्धविराम की कहानी, तेहरान-वाशिंगटन के जीत के अपने-अपने दावे, भारत पर क्या पड़ेगा असर?

Patrika Analysis: 38 दिनों तक चले इस सैन्य संघर्ष में तेहरान, वाशिंगटन और तेल अवीव ने अपने अपने जीत के दावे किए। जानिए युद्धविराम का भारत पर क्या पड़ेगा असर...

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Iran Threatens Overseas Citizens

फोटो में ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप (इमेज सोर्स: आईएएनएस)

Iran-Israel War: इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों का सीजफायर समझौता हुआ है। अगले 14 दिनों तक गोलीबारी का दौर थम जाएगा। सीजफायर के ऐलान के बाद अमेरिका और ईरान जीत को लेकर अपने-अपने दावे कर रहे हैं। 38 दिनों तक चले इस सैन्य संघर्ष में तेहरान, वाशिंगटन और तेल अवीव ने अपने-अपने सैन्य रणनीतियों में कई बदलाव किए। इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ा।

होर्मुज में ईरान के ब्लॉकेड से मचा हड़कंप

28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर हमला किया और सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई समेत कई टॉप नेताओं को मार गिराया। अमेरिकी-इजरायली हमले के ईरान ने माकूल जवाब देते हुए इजरायल पर ताबड़तोड़ हमले किए। यही नहीं खाड़ी देशों मसलन सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और इराक में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए भारी तबाही मचाई। वहीं, ईरान ने ओमान की खाड़ी और पर्सियन खाड़ी के बीच होर्मुज जलडरमरूमध्य को भी ब्लॉक कर दिया। इससे वैश्विक स्तर पर हाहाकार मच गया। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें आसामान छूने लगी।

भारत में गहराया संकट

भारत में भी LPG संकट गहरा गया। देश में गैस एजेंसियों के बाहर घरेलू गैस सिलेंडर के लिए लंबी-लंबी कतारें लग गई। कर्मशियल गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं होने की वजह से रेस्तरां बंद होने के कगार पर पहुंच गए। केंद्र सरकार को आनन-फानन में रेस्तरां में खाना पकाने के लिए जलावन और कोयला और केरोसीन की मंजूरी देनी पड़ी। वहीं, युद्ध विराम होना वैश्विक जगत सहित भारत के लिए फायदेमंद है। भारत ऊर्जा आपूर्ति के लिए पूरी तरह से मिडिल ईस्ट पर निर्भर है। LPG की अधिकतर आपूर्ति कतर से आती है। युद्धविराम का ऐलान होते ही भारतीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी दो दिवसीय दौरे पर कतर रवाना हुए हैं।

ईरान की दस सूत्रीय मांगे

ईरान ने युद्धविराम के लिए जो 10 सूत्री मांगें रखी हैं, उनमें अमेरिका से गैर-आक्रामकता की प्रतिबद्धता, हार्मुज पर ईरान के नियंत्रण को मान्यता, तेहरान के संप्रभु संवर्धन अधिकारों को स्वीकार करना, सभी प्राथमिक और द्वितीयक प्रतिबंध हटाना, संयुक्त राष्ट्र और आईएईए की दंडात्मक प्रस्तावों को समाप्त करना, अमेरिकी सैनिकों की वापसी और ईरान को मुआवजा देना शामिल है। वहीं, इन मांगों में इजरायल द्वारा तत्काल लेबनान में जारी संघर्ष को रोकने का मुद्दा भी शामिल है, जिसे इजरायल ने खारिज कर दिया। वहीं, इस बात पर अमेरिका भी सहमत नहीं दिख रहा है।

38 दिनों में वाशिंगटन ने कई बार रणनीति बदली

पिछले 38 दिनों में वाशिंगटन ने अपनी रणनीति में कई बार बदलाव किए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कभी शासन परिवर्तन की बात करते तो कभी ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम का अंत करने का दावा करते। कभी ट्रंप बोलते कि अमेरिका ने ईरानी नौसेना और वायुसेना का विनाश कर दिया तो कभी कहा कि इस युद्ध ने ईरान के एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस का पूरी तरह से अंत कर दिया है।

अमेरिका ने हर बार हमले की तीव्रता बढ़ाई

इस युद्ध को लेकर एक्सपर्ट्स ने अपनी राय जाहिर करते हुए कहा कि अमेरिका ने हर बार अपने हमले की तीव्रता बढ़ाई। विश्वविद्यालयों को निशाना बनाया गया। ऊर्जा केंद्रों और बुनियादी ढांचों को निशाना बनाया गया, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति इराक जैसा बड़ा युद्ध नहीं चाहते थे। संभवत: वह ईरानी जमीन पर सेना उतारने के पक्ष में नहीं थे। कूटनीतिक हलकों में यह माना गया कि अमेरिका का हर हमला ईरान के न्यूक्लिय प्रोग्राम को खत्म करने और उन्हें बातचीत की मेज पर लाने के लिए था।

एक्सपर्ट्स ने कहा कि फरवरी 27 तक ईरान बातचीत की मेज पर था। वह ओबामा युग के परमाणु समझौते से भी बेहतर शर्तें देने को तैयार था, लेकिन ट्रंप शायद इजरायल के प्रतिबद्धता के जाल में फंस चुके थे। हमले के बाद वह अधिकतम कूटनीतिक लाभ लेने के पक्षधर थे। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका द्वारा दिया गया 15 सूत्रीय प्रस्ताव मई 2025 के प्रस्ताव से कुछ ज्यादा अलग नहीं था।

ट्रंप ने युद्धविराम का ऐलान करते हुए ट्रूथ सोशल पर लिखा कि यह मध्य पूर्व का स्वर्ण युग हो सकता है। ईरान भी इसे चाहता है। बड़ा पैसा बनेगा। ईरान पुनर्निर्माण शुरू कर सकता है। यानी युद्ध के बाद भी ट्रंप सौदा चाहते थे, लेकिन वह उनका अपना ‘सील’ वाला सौदा होना चाहिए था।

ईरान को इस युद्ध विराम से क्या मिला

ईरान ने साल 2025 में ट्रंप के अमेरिका में दोबारा निर्वाचित होने के आने पर उनकी प्रो पीस छवि की सराहना की। बाइडेन सरकार की आलोचना की, लेकिन जब अमेरिका ने ईरान पर हमला किया तो ईरान ने तीन बातों को दुनिया के सामने रख दिया। पहला कि ईरान भारी नुकसान सह सकता है, दूसरा, अमेरिका-इजराइल के लक्ष्यों के अनुरूप आनुपातिक क्षति पहुंचाने की क्षमता रखता है, और खुद को शक्तिशाली सभ्यतागत राज्य के रूप में स्थापित करना जानता है। ईरान ने इस दौरान होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से बंद कर दिया। कुवैत सऊदी के पेट्रोकेमिकल प्लांट्स को निशाना बनाया। इससे अंतरराष्ट्रीय दवाब बढ़ा। साथ ही ईरान ने मध्यस्थों (ओमान, पाकिस्तान, चीन, रूस) के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया कि वह समान आधार पर बातचीत चाहता है। उसने हॉर्मुज से गुजरने का शुल्क लगाने जैसी मांग रखी और युद्ध क्षति मुआवजे की बात की। ट्रंप ने कई बार झूठा दावा किया कि ईरान बातचीत कर रहा है, लेकिन तेहरान ने कोई ऑफ-रैंप नहीं दिया।