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मोजतबा खामेनेई को सुप्रीम लीडर बनाने के बाद विदेश मंत्री अराघची ने दिया बयान, कहा- हम पीछे नहीं हटेंगे

ईरान के 88 धार्मिक निकाय असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने रविवार रात 56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई को आधिकारिक रूप से देश का नया सुप्रीम लीडर नियुक्त किया। यह वही संस्था है जो ईरान के सुप्रीम लीडर के चयन का अधिकार रखती है।

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भारत

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Ashib Khan

Mar 09, 2026

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ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची (Photo-ANI)

Iran new Supreme Leader Mojtaba Khamenei: ईरान में अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को सुप्रीम लीडर चुना गया है। इसके बाद विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने खामेनेई को देश का सर्वोच्च नेता चुने जाने का समर्थन दिया है। अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए नए सर्वोच्च नेता को बधाई दी। उन्होंने लिखा कि अयातुल्ला सैयद मोजतबा होसैनी खामेनेई को इस्लामिक क्रांति का तीसरा सर्वोच्च नेता चुने जाने पर बधाई।

‘एक पल भी पीछे नहीं हटेंगे’

विदेश मंत्री ने अपने संदेश में ईरान की कूटनीतिक और सुरक्षा ढांचे की ओर से नई नेतृत्व व्यवस्था के प्रति मजबूती भी पहुंचाई। उन्होंने कहा कि देश के अधिकारों की रक्षा, राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा को आगे बढ़ाने तथा इस्लामिक क्रांति के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए वे एक पल भी पीछे नहीं हटेंगे।

दरअसल, यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ है और ईरान अपने आंतरिक शासन को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। पिछले दिनों इजरायल और अमेरिका के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू हुई थी। 

ईरान के 88 धार्मिक निकाय असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने रविवार रात 56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई को आधिकारिक रूप से देश का नया सुप्रीम लीडर नियुक्त किया। यह वही संस्था है जो ईरान के सुप्रीम लीडर के चयन का अधिकार रखती है।

संसद के स्पीकर ने किया स्वागत

ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर कलीबाफ ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे देश के लिए सांत्वना देने वाला फैसला बताया। उन्होंने कहा कि देश शोक की घड़ी से गुजर रहा है, लेकिन नए लीडर का चयन राष्ट्र को मजबूत दिशा देगा।

वहीं, ईरान की सुप्रीम राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी ने भी इस प्रक्रिया को अस्वीकार्य और गैरकानूनी बताया। उन्होंने कहा कि कई बाहरी दबावों के बावजूद दिव्यांगों की सभा ने संवैधानिक प्रक्रिया के तहत नया नेतृत्व चुना है।