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कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर पार, क्या भारत में बढ़ सकते हैं डीजल पेट्रोल के दाम?

Iran war oil prices: पिछले हफ्ते ही अमेरिकी क्रूड में करीब 36% और ब्रेंट क्रूड में 28% की तेजी दर्ज की गई थी। विशेषज्ञों के मुताबिक ईरान युद्ध के कारण तेल उत्पादन और सप्लाई पर असर पड़ा है, जिससे कीमतों में तेज उछाल आया है।

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Ashib Khan

Mar 09, 2026

तेल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी

Iran war oil prices: इजरायल, अमेरिका और ईरान युद्ध के कारण वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। रविवार को कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं। दरअसल, यह साढ़े तीन साल में पहली बार पहुंची है। अमेरिकी क्रूड की कीमत आखिरी बार 30 जून 2022 को 100 डॉलर के पार गई थी, जबकि ब्रेंट क्रूड 29 जुलाई 2022 को 104 डॉलर तक पहुंचा था।

107.92 डॉलर प्रति बैरल पहुंची कीमत

अंतर्राष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज में कारोबार शुरू होते ही बढ़कर 107.97 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई, जो कि शुक्रवार के बंद भाव 92.69 डॉलर से करीब 16.5% ज्यादा है। वहीं अमेरिका में उत्पादित वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी बढ़कर 106.22 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो शुक्रवार के 90.90 डॉलर के मुकाबले करीब 16.9% अधिक है।

दरअसल, पिछले हफ्ते ही अमेरिकी क्रूड में करीब 36% और ब्रेंट क्रूड में 28% की तेजी दर्ज की गई थी। विशेषज्ञों के मुताबिक ईरान युद्ध के कारण तेल उत्पादन और सप्लाई पर असर पड़ा है, जिससे कीमतों में तेज उछाल आया है।

क्या बोले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप?

वहीं वैश्विक तेल की कीमतों में आई उछाल पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा कि अगर इससे ईरान का परमाणु खतरा खत्म हो जाता है, तो यह अल्पकालिक तेजी भी जायज है। 

सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान की परमाणु क्षमता नष्ट होने के बाद तेल की कीमतें तेजी से गिरेंगी, जो अमेरिका और विश्व की सुरक्षा के साथ ही शांति के लिए चुकाई जाने वाली एक बहुत छोटी कीमत है। 

भारत पर क्या पड़ेगा असर

कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। अगर यह तेजी लंबे समय तक बनी रहती है तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है और कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट

दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक होर्मुज़ जलडमरूमध्य से रोजाना करीब 1.5 करोड़ बैरल कच्चा तेल गुजरता है, जो वैश्विक सप्लाई का लगभग 20% है। ईरान के संभावित मिसाइल और ड्रोन हमलों के खतरे के कारण इस रास्ते से तेल टैंकरों की आवाजाही लगभग रुक गई है।

इस मार्ग से सऊदी अरब, कुवैत, इराक, कतर, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान से तेल और गैस की सप्लाई होती है। निर्यात में बाधा के चलते इराक, कुवैत और यूएई ने भी तेल उत्पादन घटा दिया है क्योंकि उनके स्टोरेज टैंक भरते जा रहे हैं।

तेल ठिकानों पर हमले से बढ़ी चिंता

युद्ध शुरू होने के बाद ईरान, इजरायल और अमेरिका ने एक-दूसरे के तेल और गैस ठिकानों पर हमले किए हैं, जिससे सप्लाई को लेकर चिंता और बढ़ गई है।