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Iran-Israel War: ईरान के लिए आगे आया चीन, इजराइल-अमेरिका के साथ जंग को लेकर दे दिया बड़ा बयान

चीन ने अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों पर गहरी चिंता जताई है। चीन ने कहा कि ईरान की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए।

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भारत

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Mukul Kumar

Feb 28, 2026

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान की मौजूदा हालत। (फोटो- ANI)

अमेरिका और इजराइल के ईरान पर किए गए मिलिट्री हमलों को लेकर चीन की प्रतिक्रिया सामने आई है। इस खूंखार कार्रवाई को लेकर चीन काफी परेशान है। उसने कहा है कि ईरान की सॉवरेनिटी, सिक्योरिटी और टेरिटोरियल इंटीग्रिटी का सम्मान किया जाना चाहिए।

चीन ने इस मिलिट्री एक्शन को तुरंत रोकने का आग्रह किया है। उसने टेंशन वाली स्थिति को और न बढ़ाने, बातचीत और नेगोशिएशन को फिर से शुरू करने की बात कही है। साथ ही चीन ने मिडिल ईस्ट में शांति और स्टेबिलिटी बनाए रखने की कोशिश करने की मांग की है।

चीन ने ईरान को बेचा था मिसाइल

बता दें कि चीन और ईरान के बीच हाल ही में एक बड़ी मिसाइल डील हुई थी। ईरान ने कुछ ही दिनों पहले चीन से सुपरसोनिक एंटी-शिप क्रूज मिसाइल खरीदा था। यह ईरान की सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक कदम था। अमेरिका और इजराइल के साथ बढ़ते तनाव के बीच यह डील हुई थी।

कौन सी मिसाइल की हुई थी डील?

ईरान ने चीन से CM-302 सुपरसोनिक एंटी-शिप क्रूज मिसाइल खरीदी थी। यह मिसाइल खासकर जहाजों को टारगेट करने के लिए डिजाइन की गई है। इसमें उच्च गति (मैक 3 तक) और रडार से बचने की क्षमता है।

इसकी रेंज लगभग 290 किलोमीटर है, जो ईरान को फारस की खाड़ी और आसपास के क्षेत्रों में नौसैनिक खतरों से निपटने में मदद कर सकती है।

क्या बोले पूर्व अमेरिकी अधिकारी?

उधर, इजराइल-ईरान तनाव में चीन के रोल के बारे में पेंटागन के पुराने अधिकारी माइकल रुबिन ने कहा- इस लड़ाई में चीन बीच में ही रहेगा। उन्होंने कहा कि जब हम चीन के ईरान का तेल खरीदने की बात करते हैं, तो साफ कर दें कि वे ऑफिशियली ज्यादा तेल नहीं खरीद रहे थे।

पेंटागन के पूर्व अधिकारी ने कहा- वे तेल को तथाकथित टीपॉट रिफाइनरियों में भेज रहे थे, जो थ्योरी में प्राइवेट और नॉन-गवर्नमेंटल थीं। वे डिस्काउंट पर सैंक्शन किया हुआ ईरानी तेल खरीद रहे थे। यह बीजिंग के लिए बहुत सारा पैसा कमाने का एक तरीका था, लेकिन इससे इनकार करने का भी एक तरीका था।

पूर्व अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि अब सऊदी अरब बीजिंग से कह रहा है या तो तुम अपना तेल हमसे खरीदो या ईरान से खरीदो। ऐसे में चीन लड़ाई में किनारे बैठ जाएगा।

उन्होंने आगे कहा कि चीन के इंटरेस्ट का इससे कोई लेना-देना नहीं है। इसका पूरा लेना-देना अमेरिकियों को मात देने से है और शायद शी जिनपिंग ने भी ईरान को कैरियर किलर मिसाइलें देकर इस युद्ध का समय तय किया है।