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Iran-Israel War: क्या बढ़ जाएंगे पेट्रोल-डीजल के दाम? ईरान-इजराइल जंग के बीच आ गई बड़ी खबर

अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले शुरू कर दिए हैं, जिससे मध्य पूर्व में युद्ध की स्थिति बन गई है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावित हो सकता है, जहाँ से वैश्विक तेल का लगभग 20 प्रतिशत निर्यात होता है।

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भारत

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Mukul Kumar

Feb 28, 2026

Rajasthan Petrol prices are more expensive than in Haryana Uttar Pradesh and Gujarat Find out rates

(फाइल फोटो- पत्रिका)

अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ दी है। इस बीच, एक और बड़ी खबर सामने आई है। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि जंग के चलते वैश्विक तेल कीमतों में भारी उछाल आ सकती है।

दरअसल, इस तनाव से होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज) युद्ध क्षेत्र में आ सकता है, जिससे मध्य पूर्व देशों से कच्चे तेल के निर्यात में बाधा आ सकती है। यही मुख्य कारण है कि सभी देशों में पेट्रोल-डीजल के दामों में तेजी आने की उम्मीद है।

मिसाइल हमलों प्रभावित हो सकती है तेल आपूर्ति

दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का 20 प्रतिशत से अधिक हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए भेजा जाता है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है।

भारी मिसाइल हमलों और डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान की नौसेना को खत्म करना सैन्य अभियान का अहम उद्देश्य बताए जाने के बाद इस क्षेत्र से तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

विश्लेषकों ने क्या कहा?

उधर, विश्लेषकों का मानना है कि इस जंग के बाद भू-राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। ऐसे में 'वार प्रीमियम' के कारण तेल कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।बता दें कि शुक्रवार को कारोबार बंद होने तक तेल कीमतें 2 प्रतिशत बढ़कर बंद हुईं।

वहीं, ब्रेंट क्रूड 72.48 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। यह बढ़ोतरी अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के कारण हुई।

उधर, बार्कलेज बैंक ने कहा है कि अगर आपूर्ति में बड़ी बाधा आती है तो ब्रेंट क्रूड की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। हालांकि, बैंक ने यह भी कहा कि तनाव बढ़ने का मतलब यह नहीं कि तुरंत आपूर्ति रुक जाएगी।

भारत में क्या होगा असर

एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, भारत ने पिछले कुछ वर्षों से खाड़ी देशों से तेल काफी कम मात्रा में आयात कर रहा है। वह इस वक्त दूसरे देशों पर ज्यादा निर्भर है। ऐसे में अब बड़ी मात्रा में तेल होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते नहीं आता।

उन्होंने कहा कि देश की तेल विपणन कंपनियों (इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम) के पास कई हफ्तों का भंडार है और विभिन्न मार्गों से आपूर्ति जारी है।

कितना तेल आयात करता है भारत?

भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। तेल कीमतों में तेजी से आयात बिल बढ़ता है और महंगाई की दर बढ़ जाती है, जो आर्थिक विकास को नुकसान पहुंचाती है।

भारत ने अमेरिका और अफ्रीका जैसे क्षेत्रों से आयात बढ़ाकर तेल स्रोतों में विविधता लाई है। भारत के पास पुदुर में 2।25 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) भंडारण क्षमता है, जबकि विशाखापत्तनम में 1।33 एमएमटी और मंगलौर में 1।5 एमएमटी कच्चे तेल भंडारण की क्षमता है।

आपात स्थिति में भारत इन रणनीतिक तेल भंडारों का उपयोग कर सकता है। जब वैश्विक कीमतें बहुत अधिक बढ़ जाती हैं, तब भी इन भंडारों का सहारा लेकर राष्ट्रीय तेल कंपनियों को राहत दी जा सकती है।