
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ। (फोटो- IANS)
ईरान और इजराइल के बीच छिड़ी भीषण जंग में पाकिस्तान ने खुलकर रुख अपनाया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा कि उन्होंने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से बात की और ईरान पर इजरायली हमलों तथा उसके बाद खाड़ी क्षेत्र में हुए हमलों की कड़ी निंदा की। शरीफ ने लिखा, 'पाकिस्तान इस मुश्किल समय में सऊदी अरब और हमारे भाई खाड़ी देशों के साथ पूरी तरह खड़ा है। हम शांति के लिए एक कंस्ट्रक्टिव भूमिका निभाने को तैयार हैं और प्रार्थना करते हैं कि रमजान की दुआएं हमारे क्षेत्र में शांति और स्थिरता लाएं।'
पाकिस्तान की विदेश नीति में यह बयान महत्वपूर्ण है, क्योंकि पाकिस्तान ने अमेरिका-इजराइल द्वारा ईरान पर हमलों को अनुचित और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करार दिया है। उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने ईरानी विदेश मंत्री से बात कर हमलों की निंदा की और तुरंत डी-एस्केलेशन की मांग की। पाकिस्तान ने ईरानियों से गैर-जरूरी यात्रा टालने की सलाह भी जारी की है। हालांकि, पाकिस्तान ने सीधे युद्ध में कूदने या सैन्य हस्तक्षेप की कोई घोषणा नहीं की है, बल्कि कूटनीतिक भूमिका पर जोर दिया है।
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने दावा किया कि ईरान के जवाबी मिसाइल हमलों में अबू धाबी में एक पाकिस्तानी नागरिक की मौत हो गई। UAE के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि ईरानी मिसाइलों को इंटरसेप्ट करते समय गिरे मलबे से यह हादसा हुआ। UAE ने ईरानी हमलों को 'राष्ट्रीय संप्रभुता का उल्लंघन' बताते हुए कड़ी निंदा की और शोक संवेदना जताई। यह पहली पुष्टि हुई मौत है जिसमें एक पाकिस्तानी शामिल है, जो खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों पाकिस्तानी मजदूरों के लिए चिंता का विषय है।
UN महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने मिडिल ईस्ट में सैन्य तनाव की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा, 'अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ बल प्रयोग तथा ईरान की क्षेत्रव्यापी जवाबी कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को कमजोर करती है। सभी सदस्य देशों को UN चार्टर सहित अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करना चाहिए।' गुटेरस ने तत्काल संघर्षविराम और डी-एस्केलेशन की अपील की, चेतावनी दी कि इससे व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का खतरा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बात की। ट्रंप ने हमलों को 'मेजर मिलिट्री ऑपरेशन' बताया और ईरानियों से सरकार पर कब्जा करने की अपील की। नेतन्याहू ने कहा कि यह ऑपरेशन ईरानी लोगों को अपना भाग्य खुद तय करने का मौका देगा। दोनों नेताओं ने ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करने और रिजीम चेंज पर जोर दिया।
Updated on:
28 Feb 2026, 9:39 PM IST
Published on:
28 Feb 2026, 9:39 PM IST
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