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स्वेज और पनामा नहर पर फीस जायज तो होर्मुज स्ट्रेट में क्यों है अवैध?

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी जंग के समय में तेहरान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर ट्रांजिट शुल्क लगाने पर अड़ा है। ऐसे हालातों में चर्चा हो रही है कि जब स्वेज और पनामा नहर पर लगने वाली फीस जायज है तो होर्मुज स्ट्रेट पर शुल्क लगाने पर बवाल क्यों मचा है?

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भारत

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Vinay Shakya

Apr 11, 2026

Strait of Hormuz

होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता जहाज (Image- IANS)

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच अभी पूरी तरह से जंग खत्म नहीं हुई है। ऐसे नाजुक हालातों में ईरान होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर 'ट्रांजिट शुल्क' लगाने की जिद पर अड़ा है। यह मांग वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल पैदा कर रही है, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों को चुनौती देती है।

होर्मुज स्ट्रेट के लिए क्या हैं अंतरराष्ट्रीय नियम?

समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (UNCLOS) अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों के उपयोग को नियंत्रित करता है। नियमों के अनुसार, होर्मुज स्ट्रैट जैसे रास्ते जो दो बड़े समुद्रों को जोड़ते हैं। वहां से गुजरने वाले जहाजों को निर्बाध मार्ग का अधिकार होता है। तटवर्ती देश मार्ग की अनुमति देने के बदले में कोई शुल्क नहीं मांग सकते हैं। ईरान की मांग है कि वह होर्मुज स्ट्रेट पर 'डी-फैक्टो' नियंत्रण रखे और टोल वसूले। ईरान की यह मांग वैश्विक अर्थव्यवस्था को बंधक बनाने जैसा है। विशेषकर खाड़ी देश जैसे सऊदी अरब, कतर और UAE और अमेरिका इसके सख्त खिलाफ हैं।

होर्मुज स्ट्रेट से फीस लेना क्यों है अवैध?

ओमान व ईरान के बीच प्राकृतिक रूप से निर्मित होर्मुज स्ट्रेट एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है। यह 34 किमीमीटर चौड़ी पट्टी के आकार का है। इसलिए कोई भी देश एकतरफा रूप से यहां टोल नहीं लगा सकता है। ईरान का प्रति बैरल 1 डॉलर या क्रिप्टोकरेंसी में टोल मांगना सीधे तौर पर UNCLOS का उल्लंघन है।

किन सेवाओं के लिए ईरान पैसा ले सकता है?

कानून के अनुसार, ईरान सामान्य ट्रांजिट शुल्क नहीं ले सकता, लेकिन वह विशिष्ट सेवाओं के लिए सीमित शुल्क ले सकता है। ईरान कुछ सुविधाएं जैसे- पायलटिंग (जहाज को रास्ता दिखाना), टगिंग (बड़े जहाजों को खींचना) और अन्य बंदरगाह सेवाओं के लिए शुल्क ले सकता है। इसमें भी शर्त यह है कि ये शुल्क किसी खास देश के खिलाफ भेदभावपूर्ण नहीं होने चाहिए।

स्वेज और पनामा नहर से फीस लेना क्यों वैध है?

स्वेज और पनामा नहर से फीस लेना क्यों वैध है, इसका सीधा जवाब है कि निर्माण। दरअसल, स्वेज और पनामा नहरें प्राकृतिक नहीं हैं। इन नहरों को खोदकर बनाया गया है। ये संबंधित देशों (मिस्र और पनामा) की संप्रभु संपत्ति मानी जाती हैं। चूंकि इन नहरों के रख रखाव और संचालन में भारी खर्च आता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय कानून इन्हें जहाजों से ट्रांजिट फीस वसूलने का कानूनी अधिकार देता है। इसके विपरीत, होर्मुज स्ट्रेट एक प्राकृतिक जलमार्ग है।

कितनी फीस लेते हैं पनामा और मिस्र?

मिस्र ने स्वेज नहर से 2022/2023 वित्त वर्ष में लगभग 9.4 अरब डॉलर का रिकॉर्ड वार्षिक राजस्व प्राप्त किया है। इसी तरह पनामा ने इस नहर से वित्त वर्ष 2025 में लगभग 5.7 बिलियन डॉलर का राजस्व अर्जित किया है।

दुनिया के अन्य समुद्री रास्तों की स्थिति

तुर्की के स्ट्रेट (बॉस्फोरस और डार्डानेल्स) 1936 के मोंट्रेक्स कन्वेंशन के तहत संचालित होते हैं, जो केवल सेवाओं के लिए मानक शुल्क की अनुमति देते हैं। यहां सामान्य ट्रांजिट फीस की अनुमति नहीं है। सिंगापुर भी सिंगापुर स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर कोई शुल्क नहीं लेता है।