
ईरान के संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़। ( फोटो: ANI)
Middle East Crisis : ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है, जहां तेहरान ने वाशिंगटन के शांति प्रस्ताव को "जमीनी हमले की साजिश" करार दिया है। ईरान के संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ ने स्पष्ट किया कि उनका देश किसी भी कीमत पर (Humiliation) और (Pressure) के आगे नहीं झुकेगा। इस बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री (Antony Blinken) या उनके उत्तराधिकारी के संदर्भ में मार्को रुबियो ने (15-point proposal) का जिक्र कर हलचल तेज कर दी है। क्षेत्र में (Hormuz Strait) की सुरक्षा और (Middle East Crisis) को लेकर दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक युद्ध अब बयानों की आग में बदल चुका है।
ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ ने सरकारी मीडिया के जरिए कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका और इज़राइल कूटनीति की आड़ लेकर ईरान पर सीधे हमले की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं। ग़ालिबफ़ के अनुसार, अमेरिका की 15 सूत्री मांगों की सूची केवल एक दबाव बनाने का जरिया है, ताकि वह उन लक्ष्यों को पा सके जिन्हें वह युद्ध के मैदान में हासिल नहीं कर पाया। उन्होंने सेना की तैयारियों पर जोर देते हुए कहा कि ईरानी राष्ट्र अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी बात रखते हुए 'फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन्स' की आशंका जताई है। ग्रीस के विदेश मंत्री के साथ चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि इज़राइल और अमेरिका अन्य देशों को इस संघर्ष में खींचने की कोशिश कर रहे हैं। अराघची ने चेतावनी दी कि ईरान के खिलाफ "बिना उकसावे की आक्रामकता" का विस्तार करने के लिए तीसरे देशों के संसाधनों का उपयोग किया जा सकता है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन होगा।
दूसरी ओर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने जी7 देशों की बैठक के बाद एक महत्वपूर्ण अपडेट दिया। रुबियो ने बताया कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से प्रस्तावित 15 सूत्री योजना पर ईरान की प्रतिक्रिया का इंतजार है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपनी क्षेत्रीय गतिविधियों और परमाणु कार्यक्रम पर कड़े प्रतिबंधों को स्वीकार करे। रुबियो ने यह भी संकेत दिया कि ईरान के भीतर से बातचीत के कुछ धुंधले संकेत मिले हैं, लेकिन अभी तक कुछ भी आधिकारिक नहीं है।
अमेरिका ने अपने सहयोगियों से अपील की है कि वे वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाएं। रुबियो का मानना है कि इस जलमार्ग की सुरक्षा केवल अमेरिका की जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए। यदि ईरान के साथ बातचीत विफल होती है, तो इस क्षेत्र में सैन्य उपस्थिति और कड़ी की जा सकती है, जिससे तेल की कीमतों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर गहरा असर पड़ सकता है।
ईरान का यह बयान दर्शाता है कि वह ट्रंप प्रशासन की 'मैक्सिमम प्रेशर' नीति के खिलाफ पूरी तरह तैयार है। तेहरान ने बातचीत की मेज पर आने के बजाय प्रतिरोध का रास्ता चुना है। आने वाले 24 से 48 घंटों में अमेरिका की इस 15 सूत्री योजना पर ईरान का आधिकारिक लिखित जवाब आ सकता है, जिससे यह तय होगा कि खाड़ी क्षेत्र शांति की ओर बढ़ेगा या महायुद्ध की ओर। इज़राइल इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर रखे हुए है। यदि ईरान और अमेरिका के बीच कोई समझौता नहीं होता है, तो इज़राइल अपनी सुरक्षा के लिए ईरान के परमाणु ठिकानों पर स्वतंत्र कार्रवाई कर सकता है। ( इनपुट: ANI )
Updated on:
29 Mar 2026 04:18 pm
Published on:
29 Mar 2026 03:48 pm
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