
ईरान की इस्लामिक रिवोल्युशनरी गार्ड कॉर्प्स । ( फोटो: द वॉशिंगटन पोस्ट)
Mojtaba Khamenei : ईरान और इजराइल के बीच चल रहा संघर्ष अब एकतरफा हमलों से आगे बढ़ कर 'टोटल वॉर'की दहलीज़ पर पहुंच गया है। 'कोम' शहर में हुए 6 भीषण धमाकों और नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के गंभीर रूप से घायल या बेहोश होने की खुफिया जानकारी के बाद मीडिया को इस युद्ध से जुड़ी कुछ अहम जानकारियां मिली हैं। मोजतबा खामेनेई की गैर मौजूदगी और सत्ता के शून्य देखते हुए, ईरान की कुलीन सेना 'इस्लामिक रिवोल्युशनरी गार्ड कॉर्प्स' ने पूरी तरह से देश का कंट्रोल अपने हाथों में ले लिया है। मीडिया के अनुसार, आईआरजीसी ने अपने भूमिगत मिसाइल बेस और ड्रोन कमांड सेंटर्स को 'डूम्सडे प्रोटोकॉल' पर डाल दिया है, जिसका मतलब है कि बिना शीर्ष नेतृत्व के आदेश के भी वे जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं।
अमेरिका और इजराइल अब सिर्फ कमांडर्स को निशाना नहीं बना रहे हैं। ट्रंप के 'डेथ प्लान' का दूसरा चरण ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को हमेशा के लिए खत्म करना है। नतांज और फोर्डो परमाणु संयंत्रों के ऊपर इजरायली फाइटर जेट्स (F-35) की हलचल अचानक तेज हो गई है। माना जा रहा है कि अगला बड़ा स्ट्राइक इन्हीं केंद्रों पर हो सकता है।
ईरान से सीधे निर्देश न मिल पाने के कारण हिजबुल्लाह, हूती और इराक-सीरिया में बैठे ईरानी समर्थित मिलिशिया गुटों को 'फ्री हैंड' दे दिया गया है। खुफिया रिपोर्ट का दावा है कि ये गुट अब इजराइल के प्रमुख शहरों और लाल सागर में अमेरिकी युद्धपोतों पर 'स्वार्म ड्रोन' और बैलिस्टिक मिसाइलों से बड़े हमलों की तैयारी कर रहे हैं।
अमेरिका की 'होर्मुज जलडमरूमध्य' खोलने की चेतावनी के जवाब में, ईरान की नौसेना ने इस अहम समुद्री रास्ते में एंटी-शिप माइन्स (समुद्री बारूदी सुरंगें) बिछाना शुरू कर दिया है। इसका सीधा मतलब है कि दुनिया भर में तेल की सप्लाई चेन बुरी तरह बाधित हो सकती है और कच्चा तेल 150 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकता है।
यह जंग अब सिर्फ ईरान और इजराइल की नहीं रह गई है। ईरान के नेतृत्व में आई अचानक कमजोरी ने एक तरफ जहां अमेरिका-इजराइल को और आक्रामक कर दिया है, वहीं IRGC के हताशा में उठाए गए कदम इस युद्ध को परमाणु हथियारों के इस्तेमाल या एक बड़े क्षेत्रीय महायुद्ध की तरफ धकेल सकते हैं।
Published on:
07 Apr 2026 03:47 pm
बड़ी खबरें
View Allविदेश
ट्रेंडिंग
