
अमेरिका-इजराइल ने ईरान के कोम' शहर पर हमले किए। (फोटो: Viral on X )
Qom City Attacks : अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को बेहद आक्रामक स्तर पर पहुंचा दिया है। ईरान के पवित्र शहर 'कोम' (Qom) सहित देश के कई अहम हिस्सों में 6 बड़े धमाके रिपोर्ट किए गए हैं, जिससे पूरा ईरान दहल उठा है। इन ताजा हमलों के पीछे की सबसे बड़ी वजह यह मानी जा रही है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा अली खामेनेई (Mojtaba Khamenei) इसी शहर में छिपे हुए हैं और खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वह गंभीर हालत में अपना इलाज करा रहे हैं।
अमेरिकी और इजराइली खुफिया एजेंसियों से प्राप्त हालिया राजनयिक मेमो के अनुसार, 56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई 'कोम' शहर में हैं और वह फिलहाल बेहोश अवस्था में हैं। उनकी हालत इतनी गंभीर बताई जा रही है कि वह शासन से जुड़ा कोई भी फैसला लेने में असमर्थ हैं। उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी 2026 को अमेरिकी-इजराइली हमले में उनके पिता और पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी, जिसके बाद 8 मार्च को मोजतबा को नया सुप्रीम लीडर चुना गया था। हालांकि, युद्ध की शुरुआत से ही वह सार्वजनिक रूप से गायब हैं। उनके इस तरह पर्दे के पीछे रहने और अब 'कोमा' या बेहोशी में होने की खबरों ने ईरान के भीतर यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि असल में इस भीषण युद्ध के दौरान देश की सत्ता कौन चला रहा है।
मोजतबा के कोम शहर में होने की पुख्ता जानकारी मिलने के बाद अमेरिका और इजराइल ने इस धार्मिक शहर को अपने हमलों का मुख्य केंद्र बना लिया है। हाल ही में कोम के मध्य इलाके में एक आवासीय इमारत पर हुए सटीक मिसाइल हमले में कम से कम 5 लोगों की मौत हो गई है। स्थानीय ईरानी प्रशासन के मुताबिक, फरवरी के अंत से शुरू हुए इस संघर्ष में अब तक कोम शहर की लगभग 1000 से ज्यादा इमारतें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। इसके अलावा ईरान के इस्फ़हान, कारज और करमानशाह जैसे शहरों में भी एक साथ 6 बड़े धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं, जिसने ईरानी सुरक्षा तंत्र में खलबली मचा दी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। अमेरिकी सेना और इजराइल मिलकर ईरानी नेतृत्व की कमर तोड़ने के एक बड़े "प्लान" पर काम कर रहे हैं, जिसके तहत ईरान के शीर्ष कमांडरों और नेताओं को चुन-चुन कर निशाना बनाया जा रहा है। अली खामेनेई की मौत के बाद अब मोजतबा और अन्य शीर्ष अधिकारी इसी 'डेथ प्लान' के राडार पर हैं। इसके साथ ही, राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को खुली चेतावनी दी है कि अगर उसने जल्द ही 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को वैश्विक व्यापार के लिए नहीं खोला, तो अमेरिका ईरान के बचे-खुचे बुनियादी ढांचे जैसे बिजली संयंत्रों और पुलों को भी पूरी तरह नेस्तनाबूद कर देगा।
एक तरफ ईरान का शीर्ष नेतृत्व गंभीर चिकित्सा और राजनीतिक संकट से जूझ रहा है, तो दूसरी तरफ अमेरिका और इजराइल के लगातार हवाई हमलों ने ईरान के सैन्य ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में हो रही देरी (कोम में उनके लिए एक बड़ा मकबरा बनाए जाने की खबर है) और मोजतबा की नाजुक हालत ने पूरे मध्य पूर्व को एक ऐसे विनाशकारी मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां कूटनीतिक शांति की गुंजाइश फिलहाल खत्म होती दिख रही है।
लगातार हो रहे इन धमाकों से ईरानी नागरिकों में खौफ और दहशत का माहौल है। आम जनता अपनी जान बचाने के लिए बंकरों और तहखानों में छिपने को मजबूर है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेषकर अरब देश, इस आक्रामक कार्रवाई पर स्तब्ध हैं और पूरे इलाके में युद्ध फैलने की आशंका से डरे हुए हैं।
अब दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हुई हैं कि क्या ईरान की सेना सुप्रीम लीडर की गैर मौजूदगी में अमेरिका और इजराइल पर कोई जवाबी हमला करेगी? इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र (UN) इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या शांति वार्ता की कोई नई गुंजाइश बनेगी, यह देखना बेहद अहम होगा।
इस युद्ध का सीधा असर दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। अमेरिका ने ईरान को 'होर्मुज जलडमरूमध्य' खोलने की जो चेतावनी दी है, उसका संबंध वैश्विक तेल व्यापार से है। अगर यह रास्ता बंद रहता है, तो दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी, जिससे भारत समेत कई देशों में पेट्रोल-डीजल महंगा हो जाएगा और महंगाई बढ़ेगी।
Updated on:
07 Apr 2026 05:55 pm
Published on:
07 Apr 2026 02:39 pm
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