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Iran-US Tension: अमेरिका को खुश करने के लिए युद्ध भड़का रही यूरोपियन यूनियन, ईरान का गुस्सा उबला

JCPOA Nuclear Deal: ईरान ने यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास पर अमेरिका को खुश करने के लिए युद्ध भड़काने का आरोप लगाया है। तेहरान का कहना है कि जब तक यूरोपीय संघ अपनी निष्पक्षता साबित नहीं करता, उसे परमाणु वार्ता पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है।

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भारत

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MI Zahir

Jun 02, 2026

Iran said, EU should prove its impartiality

ईरान का कहना है कि यूरोपीय संघ अपनी निष्पक्षता साबित करे । ( फोटो : ANI )

Iran-US Conflict : अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के चलते यूरोपियन यूनियन की भूमिका शक के दायरे में आ गई है। मिडिल ईस्ट में जारी भारी तनाव के बीच ईरान और यूरोपीय संघ के रिश्ते बेहद तल्ख हो गए हैं। फिनलैंड में मौजूद ईरानी दूतावास ने परमाणु समझौते पर यूरोपीय संघ के रवैये की तीखी आलोचना की है। ईरान ने आरोप लगाया है कि यूरोपीय संघ अपनी स्वतंत्रता खो चुका है और केवल अमेरिका के हितों को साधने के लिए एकतरफा नीतियां अपना रहा है।

काजा कल्लास पर भड़का ईरान

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर जारी एक आधिकारिक बयान में ईरानी मिशन ने यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास को सीधे निशाने पर लिया। ईरान ने उन्हें "युद्ध भड़काने वाली अधिकारी" करार दिया। दूतावास का कहना है कि ईयू के पास परमाणु समझौते के प्रति अपनी ईमानदारी दिखाने का पूरा मौका था, लेकिन कल्लास के नेतृत्व में ईरान के खिलाफ 'स्नैपबैक मैकेनिज्म' (प्रतिबंधों की बहाली का नियम) को एक्टिव करने की कोशिश की गई, जो केवल वॉशिंगटन को खुश करने का एक हथकंडा था।

'ईयू पहले अपनी निष्पक्षता साबित करे'

ईरानी दूतावास ने यूरोपीय संघ के उस दावे को भी खारिज कर दिया जिसमें वह खुद को परमाणु मामलों का विशेषज्ञ और मध्यस्थ बताता है। तेहरान ने कड़े शब्दों में कहा कि जब तक यूरोपीय संघ अपनी तटस्थता और वास्तविक सद्भावना साबित नहीं कर देता, तब तक उसे इस मामले में बोलने या आर्थिक प्रभाव का दावा करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

अमेरिका के बदलते स्टैंड पर हैदराबाद से तीखा पलटवार

इसी बीच, भारत के हैदराबाद में स्थित ईरान के महावाणिज्य दूतावास ने भी अमेरिकी कूटनीति पर तंज कसा है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के हवाले से कहा गया कि अमेरिकी प्रशासन लगातार अपने बयानों और स्टैंड को बदलता रहता है। उन्होंने कहा, "यह विरोधाभास या तो उनकी बातचीत की कोई रणनीति है या फिर अमेरिकी शासन प्रणाली की आपसी खराबी। रणनीति है तो यह ईरान पर काम नहीं करेगी, और अगर व्यवस्था की खराबी है तो अमेरिका को इसे खुद ठीक करना होगा।'

कल्लास का बयान और ट्रंप की उम्मीदें

यह पूरा विवाद तब बढ़ा जब 1 जून को इस्लामाबाद में कल्लास ने कहा कि अमेरिका-ईरान के बीच किसी भी अस्थाई शांति समझौते के बाद तेहरान के परमाणु कार्यक्रम और मिसाइलों पर गहन चर्चा होनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने हालिया हमलों के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए एक 'नाजुक कूटनीतिक रास्ता' होने की बात कही। दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उम्मीद जताई है कि अगले हफ्ते तक तेहरान के साथ युद्धविराम और समुद्री मार्ग की बहाली को लेकर एक बड़ा समझौता हो सकता है।

ईरान कूटनीतिक रूप से झुकने को तैयार नहीं

अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मत: 'ईरान का यह आक्रामक रुख दिखाता है कि वह कूटनीतिक रूप से झुकने को तैयार नहीं है। यूरोपीय संघ को अमेरिका का पिछलग्गू बताकर ईरान ने यह साफ कर दिया है कि वह भविष्य की किसी भी वार्ता में यूरोपीय देशों को एक निष्पक्ष मध्यस्थ के रूप में स्वीकार नहीं करेगा।'

अब देखना है कि ईयू कल्लास के बचाव में आधिकारिक जवाब देता है या नहीं

आगामी घटनाक्रम पर नजर: अब देखना यह होगा कि यूरोपीय परिषद की ओर से ईरान पर बढ़ाए गए हालिया प्रतिबंधों और यूक्रेन युद्ध में रूस की मदद करने के आरोपों पर ईयू कल्लास के बचाव में क्या आधिकारिक जवाब देता है। साथ ही, क्या डोनाल्ड ट्रंप की उम्मीदों के मुताबिक अगले सप्ताह तक कोई युद्धविराम समझौता धरातल पर उतर पाता है या नहीं।

होर्मुज जलडमरूमध्य और वैश्विक व्यापार संकट: इस विवाद का एक बड़ा पहलू वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग है। अगर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के चलते यह मार्ग बाधित रहता है, तो दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत सहित कई विकासशील देशों के बाजार पर पड़ेगा। (इनपुट : ANI)