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Iran-US War: हॉर्मुज को लेकर भारत का स्टैंड क्लियर, अमेरिका से युद्धपोत तैनाती पर कोई बात नहीं

Iran-US War के बीच भारत ने साफ किया कि हॉर्मुज में नौसेना तैनाती को लेकर अमेरिका से कोई चर्चा नहीं हुई है। जहाजों की सुरक्षा पर भारत की नजर।

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भारत

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Rahul Yadav

Mar 16, 2026

Iran-US War

Iran-US War (Image: Gemini)

Iran-US War: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच भारत ने हॉर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने सोमवार को कहा कि अमेरिका के साथ इस क्षेत्र में युद्धपोत भेजने को लेकर भारत की कोई द्विपक्षीय बातचीत नहीं हुई है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि इस मुद्दे पर कई देशों के बीच चर्चा चल रही है, लेकिन भारत और अमेरिका के बीच अभी तक ऐसी कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई है।

क्यों महत्वपूर्ण है हॉर्मुज स्ट्रेट

हॉर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए यहां तनाव बढ़ने से पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई देशों से इस जलमार्ग की सुरक्षा के लिए अपने युद्धपोत भेजने का आग्रह किया था, ताकि व्यापारिक जहाजों की आवाजाही सुरक्षित रह सके।

भारत की प्राथमिकता: जहाजों की सुरक्षित आवाजाही

भारत ने साफ किया है कि उसकी प्राथमिकता भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा है। सरकार इस मामले में विभिन्न देशों और क्षेत्रीय पक्षों से लगातार बातचीत कर रही है ताकि भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से इस मार्ग से गुजर सकें।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फारस की खाड़ी क्षेत्र में 22 भारतीय झंडे वाले जहाज और 600 से अधिक भारतीय नाविक मौजूद हैं, जिनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्रमुख चिंता है।

ईरान से बातचीत जारी

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी कहा है कि भारत ईरान के साथ बातचीत के जरिए जहाजों के सुरक्षित मार्ग का समाधान तलाश रहा है। उनके मुताबिक, कूटनीतिक बातचीत से कुछ सकारात्मक परिणाम भी मिले हैं, जिससे कुछ भारतीय जहाज हॉर्मुज पार कर पाए हैं।

भारत का संतुलित रुख

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत इस मुद्दे पर संतुलित कूटनीतिक रुख अपनाना चाहता है। एक ओर अमेरिका के साथ रणनीतिक संबंध हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान के साथ ऊर्जा और क्षेत्रीय सहयोग भी महत्वपूर्ण है। इसलिए भारत फिलहाल किसी सैन्य गठबंधन में शामिल होने के बजाय कूटनीति और संवाद पर जोर दे रहा है।

पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल हॉर्मुज में युद्धपोत भेजने को लेकर अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है। भारत का फोकस अपने जहाजों की सुरक्षा और क्षेत्र में तनाव कम करने पर है।