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US-Iran Peace Talks: ईरानी राष्ट्रपति का बड़ा बयान, कहा- वार्ताओं का परिणाम चाहे जो भी हो जनसेवा में रुकावट नहीं आएगी

ईरान, अमेरिका और पाकिस्तान के बीच इस्लामाबाद में उच्च स्तरीय शांति वार्ता। क्या जेडी वेंस और ईरानी प्रतिनिधिमंडल के बीच स्थायी शांति समझौते पर बनेगी सहमति? पढ़ें क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीति से जुड़ी पूरी खबर।

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Masoud Pezeshkian

Iranian President Masoud Pezeshkian (Photo - IANS)

Iran US Pakistan Talks: राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के बयानों ने वैश्विक कूटनीति के गलियारों में हलचल तेज कर दी है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में इस समय एक उच्च स्तरीय ईरानी प्रतिनिधिमंडल मौजूद है। ऐसे में राष्ट्रपति पेजेशकियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर स्पष्ट किया कि उनके प्रतिनिधिमंडल के सदस्य पूरी बहादुरी और साहस के साथ बातचीत की मेज पर ईरान के हितों की पैरवी कर रहे। उन्होंने देश की जनता को भरोसा दिलाया कि कूटनीतिक वार्ताओं का परिणाम चाहे जो भी हो, सरकार की जनसेवा और आंतरिक स्थिरता के प्रयासों में एक पल के लिए भी रुकावट नहीं आएगी।

वाशिंगटन और तेहरान में बातचीत

इस्लामाबाद का सेरेना होटल इस समय विश्व राजनीति का केंद्र बना हुआ है। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद वाशिंगटन और तेहरान के बीच अब तक की सबसे उच्च स्तरीय वार्ता शुरू हुई है। इस ऐतिहासिक बैठक में अमेरिका, ईरान और पाकिस्तान शामिल हैं। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं। उनके साथ स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुश्नर जैसे महत्वपूर्ण नाम शामिल हैं। इस बैठक से पहले अमेरिकी और ईरानी नेताओं ने पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ से अलग-अलग मुलाकातें कीं।

कड़ी सुरक्षा के बीच वार्ता

8 अप्रैल को घोषित हुए नाजुक युद्धविराम को स्थायी रूप देने के उद्देश्य से आयोजित यह वार्ता बेहद सख्त सुरक्षा घेरे में हो रही है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए पहले ही महत्वपूर्ण बैठकें की हैं।

हालांकि, बातचीत की सफलता को लेकर ईरान का रुख बेहद स्पष्ट और सशर्त है। ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने संकेत दिया है कि समझौते की पूरी संभावना अमेरिकी दृष्टिकोण पर निर्भर करती है।

उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि वार्ताकारों का सामना 'अमेरिका फर्स्ट' की नीति रखने वालों से होता है तो समझौता संभव है, लेकिन यदि 'इजरायल फर्स्ट' की सोच हावी रही, तो कोई समझौता नहीं होगा।

ईरानी नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि समझौते की विफलता की स्थिति में वे और भी अधिक मजबूती के साथ अपनी रक्षा जारी रखेंगे, जिसके लिए पूरी दुनिया को बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें इस्लामाबाद पर टिकी हैं, जहां से निकलने वाला नतीजा मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया की भू-राजनीति की नई दिशा तय करेगा।