
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Photo-IANS)
इराक की राजधानी बगदाद इन दिनों भारी उठापटक के दौर से गुजर रही है। ग्रीन जोन में छापेमारी जारी है। आज कई नेताओं को हिरासत में लिए जाने की खबर है। सेना की टैंक भी इस इलाके में दाखिल हुई है। यहां अमेरिकी दूतावास समेत कई हाई प्रोफाइल इमारतें हैं। ऐसे में रविवार सुबह ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची अचानक बगदाद पहुंच गए हैं। यह दौरा पहले से घोषित नहीं था, जो अपने आप में बड़ा सवाल खड़ा करता है कि आखिर ऐसी क्या जल्दी थी।
वहीं, अपने दौरे के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची बगदाद एयरपोर्ट के पास लेफ्टिनेंट जनरल कासिम सुलेमानी और अबू महदी अल-मुहांदिस की शहादत वाली जगह का दौरा किया। 3 जनवरी 2020 को अमेरिका ने बगदाद एयरपोर्ट पर ड्रोन हमले में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कुद्स फोर्स के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल कासिम सुलेमानी को मार गिराया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई बताया था।
असल में यह यात्रा तब हो रही है जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने खुलकर इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया को निशाने पर लिया है। रुबियो ने संयुक्त अरब अमीरात दौरे के दौरान इन गुटों की कड़ी आलोचना की। बहरीन में हुई खाड़ी सहयोग परिषद की बैठक में भी इन मिलिशिया की साफ निंदा की गई।
इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी जुलाई में अमेरिका जाना चाहते हैं। उससे पहले वाशिंगटन चाहता है कि इराक अपने करीब एक दर्जन मिलिशिया को निरस्त्र करे, जिनमें से ज्यादातर को अमेरिका आतंकी संगठन मान चुका है। जैदी इस मांग को नजरअंदाज भी नहीं कर सकते और ईरान को नाराज भी नहीं कर सकते। यही उनकी सबसे बड़ी दुविधा है।
अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद से हालात और बिगड़े हैं। ईरान ने इराक में अपने प्रॉक्सी गुटों के जरिए इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में 850 से ज्यादा हमले करवाए हैं। अमेरिकी राजनयिक ठिकानों पर भी हमले हुए हैं। यहां तक कि एक अमेरिकी पत्रकार का अपहरण भी हो चुका है। इराक अब सीधे एक मोर्चा बन गया है।
अराघची की इस यात्रा का एक और पहलू है। ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार और इराक में विदाई समारोह की तैयारियों को लेकर भी दोनों देशों के बीच बातचीत होनी है। इराक में अरबाईन का पवित्र धार्मिक आयोजन भी चल रहा है जिसमें लाखों शिया श्रद्धालु शामिल हैं। ऐसे में यह दौरा धार्मिक और कूटनीतिक दोनों मोर्चों पर अहम है।
Published on:
28 Jun 2026 12:59 pm
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