
Islamabad Talks Update (Image: ANI)
Islamabad Talks Update: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच एक ओर जहां अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता जारी है, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने माहौल को और गर्म कर दिया है। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को हर हाल में खोला जाएगा, चाहे इसके लिए ईरान की सहमति हो या नहीं।
ट्रंप ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बाधित नहीं होने दिया जाएगा और होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बंद रखने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती है। उन्होंने संकेत दिया कि जरूरत पड़ी तो अमेरिका एकतरफा कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने यह भी कहा कि उनका प्राथमिक लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल का लगभग 20 फीसदी हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इस रास्ते पर किसी भी तरह की बाधा का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार और तेल की कीमतों पर पड़ता है।
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका, ईरान और पाकिस्तान के बीच त्रिपक्षीय शांति वार्ता जारी है। इस बातचीत का उद्देश्य हाल ही में 8 अप्रैल को घोषित युद्धविराम को स्थिर बनाना और क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करना है।
इस वार्ता में अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं, जिनके साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी मौजूद हैं। वहीं ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची जैसे वरिष्ठ नेता शामिल हैं।
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने उम्मीद जताई है कि अमेरिका और ईरान शांति वार्ता में सकारात्मक तरीके से हिस्सा लेंगे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान दोनों पक्षों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने और संघर्ष का “स्थायी और टिकाऊ समाधान” निकालने में अपनी भूमिका निभाता रहेगा।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से बात की। मैक्रों ने कहा कि हालात को शांत करने के लिए पाकिस्तान में चल रही युद्धविराम वार्ता बहुत जरूरी है। उन्होंने ईरान से कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सुरक्षित और सामान्य बनाई जाए। साथ ही मैक्रों ने कहा कि फ्रांस इसमें मदद के लिए तैयार है और लेबनान समेत हर जगह युद्धविराम का पालन जरूरी है।
सूत्रों के मुताबिक, यह पहली बार है जब युद्धविराम के बाद दोनों देश सीधे आमने-सामने बैठकर बातचीत कर रहे हैं। इससे पहले वार्ता अप्रत्यक्ष रूप से चल रही थी, जिसमें पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था। इसे कूटनीतिक स्तर पर एक महत्वपूर्ण प्रगति माना जा रहा है।
जहां एक ओर वार्ता से समाधान की उम्मीद जताई जा रही है, वहीं ट्रंप के सख्त बयान ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। ईरान पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह अपने हितों से समझौता नहीं करेगा। ईरान की ओर से यह भी संकेत दिए गए हैं कि बातचीत का नतीजा काफी हद तक अमेरिका के रुख पर निर्भर करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयानों से वार्ता पर दबाव बढ़ सकता है और किसी समझौते तक पहुंचने का रास्ता और जटिल हो सकता है। फिलहाल, इस्लामाबाद में जारी बातचीत और ट्रंप के कड़े रुख के बीच पूरी दुनिया की नजरें इस घटनाक्रम पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि क्या दोनों देश कूटनीतिक रास्ते से समाधान निकाल पाते हैं या तनाव और बढ़ता है।
Published on:
11 Apr 2026 09:58 pm
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