
इजराइल और लेबनान के बीच शांति वार्ता
Israel-Lebanon: इजराइल और लेबनान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच अब शांति की उम्मीद जगी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया है कि गुरुवार को दोनों देश करीब 34 साल बाद उच्च स्तरीय वार्ता के लिए आमने-सामने आने वाले हैं। जिसका मकसद युद्ध को रोकना और क्षेत्र में स्थिरता लाना है।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया 'ट्रुथ पर एक पोस्ट में, ट्रंप ने कहा कि इस कदम का मकसद दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करना है। उन्होंने कहा "इजराइल और लेबनान के बीच थोड़ी राहत दिलाने की कोशिश कर रहा हूं। दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुए काफी समय हो गया है, करीब 34 साल। यह बातचीत इसलिए भी जरूरी है क्योंकि 1993 के बाद से दोनों देशों के बीच कोई उच्च स्तरीय सीधी चर्चा नहीं हुई थी।
मंगलवार को अमेरिका की देखरेख में एक बड़ी मीटिंग हुई थी, जिसमें इस बातचीत का रास्ता साफ हुआ। इस वार्ता का मुख्य मकसद युद्ध रोकना और सुरक्षा को लेकर आपसी तालमेल बिठाना है। 1993 के बाद यह पहला मौका है जब इतने ऊंचे स्तर पर दोनों देश बात करेंगे।
इजराइल ने साफ कर दिया है कि वह लेबनान में एक्टिव गैर-सरकारी सशस्त्र समूहों (हिजबुल्लाह) को पूरी तरह निहत्था देखना चाहता है। इजराइल का कहना है कि वह लेबनान सरकार के साथ मिलकर अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहता है। वहीं लेबनान ने नवंबर 2024 के युद्धविराम समझौते को पूरी तरह लागू करने और अपनी संप्रभुता के सम्मान पर जोर दिया है। साथ ही, लेबनान चाहता है कि युद्ध से पैदा हुए मानवीय संकट को तुरंत हल किया जाए।
वॉशिंगटन को उम्मीद है कि यह वार्ता केवल युद्ध रोकने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि एक शांति डील का रास्ता साफ करेगी। यदि शांति स्थापित होती है, तो लेबनान के लिए पुनर्निर्माण और विदेशी निवेश के बड़े दरवाजे खुल सकते हैं। अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि कोई भी युद्धविराम समझौता केवल दोनों सरकारों के बीच होना चाहिए, जिसमें अमेरिका मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा।
Updated on:
16 Apr 2026 04:13 pm
Published on:
16 Apr 2026 04:13 pm
