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इजरायल ने ईरान को दी खुली धमकी, कहा- ‘समझौता नहीं किया तो होंगे और भीषण हमले’

Israel Katz warning to Iran: अमेरिका-ईरान के बीच 21 अप्रैल को खत्म हो रहे युद्धविराम से पहले तनाव बढ़ा। इजरायल ने ईरान को दी खुली चेतावनी, कहा- परमाणु राह न छोड़ी तो होंगे घातक परिणाम। जानें आर्थिक दबाव और होर्मुज़ स्ट्रेट की नाकेबंदी का पूरा मामला।

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Israeli Defence Minister Israel Katz

इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज। (File Photo/@Israel_katz)

Israel on Iran: अमेरिका और ईरान के बीच 21 अप्रैल को समाप्त हो रहे दो सप्ताह के युद्ध विराम से पहले समझौते को लेकर दुनिया भर के देशों की शांति की कोशिशें शुरू हो गई हैं। इसी कड़ी में इजरायल ने ईरान को खुली धमकी दी है कि यदि उसने अमेरिका के साथ जारी बातचीत को लेकर समझौता नहीं किया तो उस पर पहले से भी घातक परिणाम होंगे।

इसको लेकर इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कहा है कि अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान के सभी रणनीतिक ठिकानों और रणनीतिक क्षमताओं को निशाना बनाया गया था और अब अगर जरूरत पड़ी, तो हम वापस आकर फिर ऐसा करेंगे।

'ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है ईरान'

तेल अवीव में मंत्रालय में आयोजित एक स्मारक समारोह में बोलते हुए, इजरायल के रक्षामंत्री काट्ज ने कहा कि ईरान एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है। उन्होंने ईरान से आग्रह किया कि वह स्थिरता और पुनर्निर्माण का रास्ता चुने, वरना उसे ऐसे रास्ते का सामना करना पड़ेगा जो गहरी खाई की ओर ले जाता है।

उन्होंने कहा, 'एक रास्ता आतंकवाद और परमाणु हथियारों का रास्ता छोड़ने और स्थिरता और पुनर्निर्माण का भविष्य चुनने की ओर ले जाता है, जैसा कि अमेरिका ने प्रस्ताव दिया है। दूसरा रास्ता एक ऐसी गहरी खाई की ओर ले जाता है जिससे ईरानी शासन कभी बाहर नहीं निकल पाएगा।'

गंभीर आर्थिक दबाव का सामना कर रहा ईरान

आपको बता दें कि ईरान पिछले 47 सालों से प्रतिबंधों और पिछले कुछ सालों से गंभीर आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है, इसलिए अब जब अमेरिका होर्मुज़ स्ट्रेट की नाकेबंदी कर रहा है, तब भी ईरानियों के लिए बहुत कुछ बदलने वाला नहीं है। ईरान ने विदेशों में तेल बेचने के तरीकों में विविधता लाई है। वे दूसरे नामों से तेल बेच रहे हैं और राष्ट्रीय सीमाओं के बाहर इसकी तस्करी करने के काम में माहिर हो गए हैं।

अमेरिका के लिए ईरान को और ज्यादा मुश्किल में डालना बहुत चुनौतीपूर्ण होगा, क्योंकि वह पहले से ही मुश्किल हालात में जी रहा है। ईरान बातचीत के अगले दौर को लेकर आशावादी नहीं है। वे अमेरिका पर विरोधाभासी रुख अपनाने का आरोप लगा रहे हैं, और उनका मानना ​​है कि इजरायल इस प्रक्रिया में रुकावट डालने का काम कर रहा है।