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काश पटेल की FBI से होगी छुट्टी? ट्रंप प्रशासन में भारतीय मूल के चीफ पर संकट, जानिए क्या है कारण

White House Kash Patel Rumours: क्या भारतीय मूल के काश पटेल की FBI डायरेक्टर पद से छुट्टी होने वाली है? शराब से जुड़े पुराने विवाद, ईरानी हैकर्स द्वारा ईमेल हैक और पाम बोंडी की बर्खास्तगी के बाद काश पटेल की कुर्सी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं? जानें पूरा मामला।

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भारत

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Rahul Yadav

Apr 26, 2026

Kash Patel FBI Director Removal News

व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ भारतीय मूल के अधिकारी काश पटेल। (Photo: ANI)

Kash Patel FBI Director Removal News: अमेरिका की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज है। इस बार चर्चा के केंद्र में भारतीय मूल के काश पटेल हैं। जिनकी कुर्सी पर खतरे की अटकलें लगाई जा रही हैं। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन में अगला बड़ा फैसला FBI नेतृत्व को लेकर हो सकता है। हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन बढ़ते विवाद, सुरक्षा चूक और अंदरूनी असंतोष ने इस मुद्दे को गंभीर बना दिया है।

रिपोर्ट्स में क्यों उठी हटाए जाने की चर्चा

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स, खासकर पॉलिटिको (Politico) जैसी संस्थाओं के हवाले से यह बात सामने आई है कि व्हाइट हाउस के अंदर काश पटेल को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। कुछ अधिकारियों का मानना है कि काश पटेल को जल्द ही पद से हटाया जा सकता है।

हालांकि, आधिकारिक तौर पर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने यह संकेत दिया है कि अभी भी पटेल पर भरोसा कायम है। यही वजह है कि स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन अटकलें लगातार तेज हो रही हैं।

शराब से जुड़े विवाद क्या हैं?

काश पटेल से जुड़े विवादों में सबसे ज्यादा चर्चा उनके शराब से जुड़े मामलों की हो रही है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि उन्होंने अतीत में सार्वजनिक जगहों पर शराब पीने के मामलों में गिरफ्तारी का सामना किया था।

इसके अलावा, एक रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि वे ज्यादा शराब पीने के लिए जाने जाते हैं। हालांकि पटेल ने इन आरोपों को खारिज किया है और यहां तक कि एक मीडिया संस्थान के खिलाफ भारी भरकम मानहानि का मुकदमा भी दायर किया है। पटेल साफ कहा है कि कभी भी अपने आधिकारिक काम के दौरान नशे की हालत में काम नहीं किया।

ईमेल हैकिंग मामला: सुरक्षा में चूक या बड़ी लापरवाही?

मार्च 2026 में एक बड़ा विवाद सामने आया जब ईरान से जुड़े एक कथित हैकर ग्रुप ने काश पटेल की निजी ईमेल हैक करने का दावा किया। इस हैक के बाद कुछ निजी जानकारी और दस्तावेज सार्वजनिक किए गए, जिन्हें अमेरिकी अधिकारियों ने संभवतः असली माना।

FBI जैसे संवेदनशील संस्थान के प्रमुख की ईमेल हैक होना एक गंभीर सुरक्षा चूक माना जाता है। इससे न सिर्फ पटेल की व्यक्तिगत विश्वसनीयता पर सवाल उठे, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी।

पाम बोंडी की बर्खास्तगी से जुड़ाव

2 अप्रैल 2026 को पाम बोंडी को उनके पद से हटाया गया था। काश पटेल को उनका करीबी माना जाता है, इसलिए इस फैसले के बाद से ही यह चर्चा शुरू हो गई थी कि अगला नंबर उनका हो सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप बोंडी के कामकाज से खुश नहीं थे, खासकर कुछ संवेदनशील मामलों को लेकर। इसी संदर्भ में पटेल का नाम भी चर्चा में आने लगा।

FBI के अंदर से भी विरोध

स्थिति तब और जटिल हो गई जब FBI के कुछ एजेंटों ने खुद काश पटेल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की। इन एजेंटों का आरोप था कि उन्हें गलत तरीके से नौकरी से निकाला गया, क्योंकि वे 2020 के चुनाव से जुड़े मामलों की जांच कर रहे थे।

यानी विरोध सिर्फ राजनीतिक या बाहरी नहीं है, बल्कि एजेंसी के अंदर से भी आवाज उठ रही है जो किसी भी प्रमुख पद के लिए चिंता का विषय बन जाता है।

व्हाइट हाउस का आधिकारिक रुख

इन सभी विवादों के बीच व्हाइट हाउस की ओर से साफ किया गया है कि अभी तक ट्रंप का भरोसा काश पटेल पर बना हुआ है। प्रेस सेक्रेटरी ने कहा कि राष्ट्रपति का समर्थन अभी भी उनके साथ है। इसका मतलब है कि फिलहाल कोई तत्काल फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन हालात तेजी से बदल सकते हैं।

काश पटेल कौन हैं?

काश पटेल भारतीय मूल के अमेरिकी अधिकारी हैं और वर्तमान में FBI के डायरेक्टर के रूप में काम कर रहे हैं। वे ट्रंप के मेक अमेरिका ग्रेट अगेन (MAGA) अभियान से जुड़े रहे हैं और उन्हें ट्रंप का भरोसेमंद माना जाता है।

पटेल डीप स्टेट जैसे मुद्दों पर भी खुलकर बोलते रहे हैं और इस विषय पर उन्होंने एक किताब भी लिखी है। यही वजह है कि वे समर्थकों के बीच लोकप्रिय हैं, लेकिन विरोधियों के निशाने पर भी रहते हैं।

काश पटेल को लेकर फिलहाल स्थिति अनिश्चित बनी हुई है। एक तरफ विवाद, सुरक्षा चूक और अंदरूनी विरोध हैं, तो दूसरी तरफ ट्रंप का भरोसा भी उनके साथ है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या ये अटकलें हकीकत में बदलती हैं या फिर यह सिर्फ राजनीतिक दबाव और मीडिया रिपोर्ट्स तक सीमित रह जाती हैं।

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