
ईरान-इजरायल युद्ध (Video Screenshot)
Direct Negotiations: मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है।अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी में इजरायल और लेबनान के बीच शांति स्थापित करने को लेकर दो घंटे की "सकारात्मक चर्चा" हुई। दोनों देश भविष्य में सीधी बातचीत के लिए सहमत हो गए हैं। लेकिन, कूटनीतिक टेबल पर शांति की इन बातों के ठीक कुछ घंटों बाद ही इजरायल और लेबनानी गुट हिजबुल्लाह ने एक-दूसरे पर सीमा पार से फिर हमले शुरू कर दिए, जिसने क्षेत्र में शांति की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। एक ओर अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में वार्ता विफल होने के बाद अब इजरायल और लेबनान में तनाव बढ़ गया है।
अमेरिकी मध्यस्थता में हुई इस अहम बैठक में कई गंभीर मुद्दों पर चर्चा की गई। इसमें हिजबुल्लाह को निहत्था करना, दक्षिणी लेबनान में पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था लागू करना, लेबनान की युद्धविराम की मांग और दोनों देशों के बीच भविष्य के संबंधों (स्थायी शांति समझौते की संभावना) पर जोर दिया गया। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने जानकारी दी कि सभी पक्ष आपसी सहमति से तय समय और स्थान पर सीधी बातचीत शुरू करने के लिए राजी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि युद्धविराम का कोई भी समझौता अमेरिकी मध्यस्थता के जरिये ही होगा, किसी अलग ट्रैक से नहीं।
शांति वार्ता के बीच जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट है। इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के जहरानी नदी के दक्षिण में रहने वाले निवासियों के लिए एक सख्त चेतावनी जारी की है। इजरायली सेना के प्रवक्ता ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर कहा कि क्षेत्र में हवाई हमले जारी हैं और उनकी सेना वहां "काफी ताकत के साथ काम कर रही है।" सेना ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि जहरानी नदी के दक्षिण में रुकना लोगों और उनके परिवारों की जान जोखिम में डाल सकता है।
इस बीच, ईरान ने भी आक्रामक रुख अपना लिया है। ईरान के विज्ञान मंत्री होसैन सिमाई सर्राफ ने 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के हमलों का शिकार हुए तेहरान के एयरोस्पेस रिसर्च इंस्टीट्यूट का दौरा किया। क्षतिग्रस्त इमारत का मुआयना करने के बाद उन्होंने कहा, "हम एक ऐसे दुश्मन का सामना कर रहे हैं जो नैतिकता, कानून या किसी अन्य व्यवस्था को नहीं मानता।" ईरानी मीडिया द्वारा जारी वीडियो में इमारत को हुए भारी नुकसान को दिखाया गया है। मंत्री ने चेतावनी दी कि देश में बनी कोई भी सुविधा खतरे से बाहर नहीं है। वहीं दूसरी तरफ, इस पूरे तनाव के बीच हूतियों की गतिविधियां भी क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा रही हैं।
एक तरफ शांति की बातें और दूसरी तरफ हवाई हमले, अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस दोहरे रवैये की कड़ी आलोचना कर रहा है। शांति कार्यकर्ताओं का मानना है कि जब तक जमीनी स्तर पर बंदूकें शांत नहीं होतीं, तब तक वाशिंगटन में हुई किसी भी चर्चा का कोई ठोस परिणाम नहीं निकलेगा। वहीं, ईरान के सख्त बयानों ने यह साफ कर दिया है कि वह पीछे हटने वाला नहीं है। अब कूटनीतिक गलियारों की नजरें इस बात पर हैं कि लेबनान और इजरायल के बीच अगली 'सीधी बातचीत' कब और कहां होगी। क्या अमेरिका हिजबुल्लाह पर दबाव बनाकर उसे वार्ता की शर्तों को मानने के लिए राजी कर पाएगा? इसके साथ ही दक्षिणी लेबनान से विस्थापित हो रहे नागरिकों के लिए अंतरराष्ट्रीय राहत एजेंसियां क्या कदम उठाती हैं, यह भी देखना अहम होगा।
इस पूरे परिदृश्य का एक बड़ा पहलू हिजबुल्लाह का हथियार डालना है, जो कि लेबनान की आंतरिक राजनीति के लिए एक लगभग असंभव सा लक्ष्य माना जाता है। इसके अलावा, ईरान के एयरोस्पेस इंस्टीट्यूट पर हमले ने यह दिखा दिया है कि यह लड़ाई अब सिर्फ सीमा विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले चुकी है जिसमें तकनीक और स्पेस रिसर्च सेंटर्स भी सीधे निशाने पर हैं।
Published on:
15 Apr 2026 04:21 pm
बड़ी खबरें
View Allविदेश
ट्रेंडिंग
