
नई दिल्ली।
तुर्की की मुद्रा लीरा में गिरावट का दौर जारी है। मंगलवार को यह गिरावट अचानक 15 प्रतिशत तक हो गई। इसके बाद से तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैयब एर्दोगन से इस्तीफा मांगा है। तुर्की की मुख्य विपक्षी पार्टी के नेता ने कहा है कि उनका देश तबाही से जूझ रहा है। बीते करीब दो दशक से तुर्की की सत्ता पर काबिज एर्दोगन का तुर्की में जमकर विरोध शुरू हो गया है।
इससे पहले, गत मंगलावर को लीरा में 15 प्रतिशत की गिरावट आई थी। तुर्की में विपक्षी दल रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी के नेता केमाई कुलेस्तरो ने बताया कि तुर्की के इतिहास में पहले ऐसा कभी नहीं हुआ। यही नहीं तुर्की में महंगाई का स्तर भी बढ़ गया है और यह 20 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
विपक्षी दल के केमाई कुलेस्तरो ने तुर्की की मुद्रा लीरा में गिरावट के लिए राष्ट्रपति रेचप तैयब एर्दोगन को जिम्मेदार ठहराया है। बता दें कि तुर्की राष्ट्रपति एर्दोगन वर्ष 2003 से सत्ता में हैं। वहीं, केमाई ने दावा किया कि एर्दोगन तुर्की की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए मूल समस्या बन गए हैं। इस वर्ष लीरा में 42 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। लीरा में गिरावट के बाद इस समय एक डॉलर की कीमत 13 लीरा से भी पार हो गई है। वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि यह किसी डरावनी फिल्म की तरह है। यह कहना मुश्किल है कि यह गिरावट कहां जाकर थमेगी।
बीते सोमवार को एर्दोगन ने केंद्रीय बैंक से ब्याज दर में कटौती के लिए कहा था जबकि अर्थशास्त्रियों का कहना था कि इससे महंगाई और बढ़ेगी। तुर्की में महंगाई दर 20 प्रतिशत पर गई है। इसका मतलब यह हुआ को तुर्की को अब जरूरी सामान खरीदने में ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे।
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दूसरी ओर एर्दोगन अपनी गलतियां मानने को तैयार नहीं हैं। रेचप तैयब एर्दोगन ने कहा कि यह तुर्की के खिलाफ एक वैश्विक साजिश है, मगर वह मौकापरस्तों के सामने हथियार नहीं डालेंगे। एर्दोगन ने मौजूदा हालात की तुलना पहले विश्व युद्ध के बाद 1923 में आधुनिक तुर्की बनने के दौरान से की है।
एर्दोगन ने कहा कि अल्लाह और तुर्की के लोगों की मदद से उनका मुल्क आर्थिक स्वतंत्रता की जंग जीतने में कामयाब रहेगा। उन्होंने केंद्रीय बैंक पर ब्याज दर में कटौती के लिए दबाव बनाया था।
Published on:
24 Nov 2021 06:46 pm
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