
अकेलेपन को विश्व स्वास्थ्य संगठन0 ‘वैश्विक स्वास्थ्य खतरा’ घोषित कर चुका है। (Photo Credit - IANS)
इंटरनेट और सोशल मीडिया से पूरी दुनिया हमारी हथेली पर सिमट गई। जाने-अनजाने दोस्तों के अलावा न्यूज चैनल्स, रील्स ने हमें चौबीसों घंटे बांधे रखती है। लेकिन भीतर की खामोशी हमें अकेला कर रही है। अकेलेपन को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) इसे ‘वैश्विक स्वास्थ्य खतरा’ घोषित कर चुका है। हैरानी की बात ये है कि जिसे कभी सिर्फ बुजुर्गों की समस्या माना जाता था, वह अब युवा और बच्चों को भी चपेट में ले रही है। डब्लूएचओ और द लैंसेट की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में चार में एक वयस्क सामाजिक अलगाव या अकेलेपन का सामना कर रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक लंबे समय तक अकेलापन महसूस करना स्वास्थ्य के उतना ही हानिकारक है, जितना एक दिन में 15 सिगरेट पीना। यह मोटापे और शारीरिक निष्क्रियता से भी ज्यादा घातक है। एक रिपोर्ट के मुताबिक कम आय वाले देशों में अकेलेपन की दर सबसे ज्यादा 24 फीसदी है, जो उच्च आर्य वर्ग वाले देशों में लगभग 11 फीसदी है।
जयपुर के एमएमएस मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सक डॉ पीएल भालोठिया ने कहा, अकेलेपन में व्यक्ति सामाजिक या भावनात्मक रूप से खुद को अलग-थलग महसूस करता है। इससे एंजाइटी, आत्मविश्वास की कमी, डिप्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इससे बचने के लिए सामाजिक मेलजोल बढ़ाएं, संयुक्त परिवार कल्चर से जुड़ें, परिवार-मित्रों से बात करें और अपने शौक को समय दें। मनोचिकित्सक की राय लें।
Published on:
11 Jan 2026 03:34 am
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