
बहरीन की सेना ने मिसाइल व ड्रोन तबाह किए । (फोटो: द वॉशिंगटन पोस्ट)
Middle East Conflict: मध्य पूर्व में युद्ध के बादल अब और भी घने हो गए हैं। अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ छेड़े गए युद्ध के बाद से इस पूरे क्षेत्र में लगातार हवाई हमले हो रहे हैं। इस बीच, बहरीन की सेना ने एक बेहद चौंकाने वाला और अहम आंकड़ा जारी किया है। बहरीन के रक्षा बलों के अनुसार, उन्होंने 28 फरवरी से लेकर अब तक कुल 617 खतरनाक ड्रोन और मिसाइलों को आसमान में ही मार गिराया है। यह आंकड़ा इस बात का साफ संकेत है कि यह महायुद्ध अब केवल ईरान की सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि आस-पास के खाड़ी देश भी इसकी पूरी तरह चपेट में आ चुके हैं।
बहरीन की सेना की ओर से साझा की गई रिपोर्ट के मुताबिक, नष्ट किए गए हथियारों में दो तरह के मुख्य खतरे शामिल थे।
आसान भाषा में समझें तो, औसतन हर दिन कई ड्रोन और मिसाइलें बहरीन के हवाई क्षेत्र में घुसपैठ कर तबाही मचाने की कोशिश कर रही हैं, जिन्हें सेना अपनी मुस्तैदी से नाकाम कर रही है।
यह सारा विवाद और हमलों का यह खौफनाक सिलसिला फरवरी के अंत में तब तेज हुआ, जब संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ एक बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत की। बहरीन अमेरिका का एक बेहद खास रणनीतिक सहयोगी है और वहां अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा भी तैनात है। इसी वजह से ईरान या उसके समर्थक गुटों की तरफ से होने वाले जवाबी हमलों का सीधा असर बहरीन के हवाई क्षेत्र पर देखने को मिल रहा है।
बहरीन की ओर से जारी किए गए इन आंकड़ों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र ने गहरी चिंता व्यक्त की है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इतने कम समय में 600 से अधिक हवाई हमलों का होना एक विनाशकारी क्षेत्रीय युद्ध का सायरन है। स्थानीय जनता में दहशत का माहौल है, क्योंकि हथियारों की इतनी बड़ी संख्या यह दर्शाती है कि हालात किसी भी समय बेकाबू हो सकते हैं। वहीं, पश्चिमी देशों ने बहरीन की अचूक वायु रक्षा प्रणाली की जमकर तारीफ की है, जिसने अब तक किसी भी बड़े जान-माल के नुकसान को सफलतापूर्वक रोका है।
इन लगातार हो रहे हमलों को देखते हुए बहरीन के रक्षा मंत्रालय ने अपनी पूरी सेना और मिसाइल डिफेंस सिस्टम को हाई अलर्ट (High Alert) पर रख दिया है। आने वाले दिनों में बहरीन अपने हवाई क्षेत्र की सुरक्षा को और भी अभेद्य बनाने के लिए अमेरिका से अतिरिक्त 'पैट्रियट मिसाइल सिस्टम' और राडार की तत्काल मांग कर सकता है। साथ ही, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे पड़ोसी देश भी अपनी सैन्य गश्त बढ़ा रहे हैं और संयुक्त रूप से इस हवाई खतरे से निपटने की नई रणनीतियां तैयार कर रहे हैं।
इस सैन्य टकराव का एक सबसे बड़ा 'साइड एंगल' वैश्विक अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल के बाजार पर पड़ रहा है। बहरीन और उसके पड़ोसी देश कच्चे तेल के उत्पादन के सबसे बड़े केंद्र हैं। यदि यह युद्ध ऐसे ही खिंचता रहा और गलती से कोई मिसाइल किसी बड़ी तेल रिफाइनरी पर गिर गई, तो पूरी दुनिया में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आग लग जाएगी। इसके अलावा, इस तनाव से खाड़ी देशों में काम करने वाले लाखों भारतीय और एशियाई कामगारों की सुरक्षा पर भी भारी संकट आ गया है। अगर हालात बिगड़े, तो एयरलिफ्ट और बड़े पैमाने पर स्वदेश वापसी जैसी नौबत आ सकती है।'
Published on:
03 Apr 2026 05:03 pm
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