
इजरायल.अमेरिका-ईरान युद्धविराम के बावजूद मिसाइल अलर्ट। (फोटो: द वॉशिंगटन पोस्ट)
Ceasefire : अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा से दुनिया ने अभी राहत की सांस ली ही थी कि मध्य पूर्व में एक बार फिर दहशत का माहौल बन गया है। बुधवार सुबह शांति की उम्मीदों को उस वक्त तगड़ा झटका लगा, जब बहरीन ने अचानक मिसाइल अलर्ट जारी कर दिया। इसके कुछ ही देर बाद संयुक्त अरब अमीरात , इजरायल, सऊदी अरब और कुवैत में भी खतरे के सायरन बजने लगे। इस घटना ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है कि क्या यह सीजफायर महज़ एक दिखावा था ?
इस अचानक हुए घटनाक्रम पर अलग-अलग देशों की मीडिया का रुख भी बंटा हुआ है:
अमेरिकी मीडिया: अमेरिकी प्रेस इसे युद्धविराम का सीधा उल्लंघन मान रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स में आशंका जताई जा रही है कि ईरान या उसके समर्थित गुटों ने अमेरिका को धोखा दिया है।
ईरानी मीडिया: ईरान का मीडिया इसे अमेरिका और इजराइल की 'तकनीकी खराबी' या साइबर हमले का नतीजा बता रहा है। उन्होंने किसी भी मिसाइल लॉन्च से साफ इनकार किया है।
संयुक्त अरब अमीरात मीडिया: यूएई की मीडिया ने संयम बरतते हुए नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है, साथ ही अपने एयर डिफेंस सिस्टम की मजबूती पर जोर दिया है।
इज़रायली मीडिया: इजरायल में इसे लेकर भारी गुस्सा है। इजरायली मीडिया इसे ईरान की चाल बता रहा है और सेना से तुरंत और कड़ी जवाबी कार्रवाई की मांग कर रहा है।
कुवैती मीडिया: कुवैत का प्रेस इस घटना को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा बता रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तुरंत दखल देने की अपील कर रहा है।
मिसाइल सायरन बजते ही इन पांचों देशों में आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। लोग घबराहट में बम शेल्टरों और सुरक्षित बंकरों की तरफ भागने लगे। इजरायल और खाड़ी देशों की सेनाओं ने अपनी वायु रक्षा प्रणालियों (जैसे आयरन डोम और पैट्रियट) को सर्वोच्च अलर्ट पर रख दिया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वास्तव में कोई मिसाइल दागी गई थी, या यह रडार सिस्टम में कोई 'फॉल्स अलार्म' था? रक्षा विशेषज्ञ और खुफिया एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि सायरन बजने का असली कारण क्या था। अगर वाकई मिसाइलें दागी गई हैं, तो इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता खटाई में पड़ सकती है।
इस घटना का एक साइबर युद्ध भी हो सकता है। कुछ रक्षा जानकारों का मानना है कि सीजफायर को नाकाम करने के लिए किसी तीसरे देश या अज्ञात हैकर्स ने खाड़ी देशों के रडार सिस्टम को हैक कर लिया हो। वहीं, दूसरी आशंका यह है कि ईरान के नियंत्रण से बाहर जाकर किसी चरमपंथी गुट ने जानबूझ कर यह हरकत की हो ताकि युद्ध न रुके।
Updated on:
08 Apr 2026 11:01 am
Published on:
08 Apr 2026 10:57 am
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