
ईरान में हमला। (फोटो- The Washington Post)
ईरान में अमेरिका-इजराइल ने 30 से ज्यादा विश्वविद्यालयों पर सीधे हमले किए हैं। इससे छात्रों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ा है। ईरान के विज्ञान मंत्री ने हुसैन सिमाई सर्राफ कहा है कि अमेरिका और इजराइल के साथ चल रहे युद्ध के दौरान अब तक 30 से ज्यादा ईरानी विश्वविद्यालयों को सीधे हमलों के बाद भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है।
सर्राफ ने आगे कहा- अमेरिकी-इजराइली हमलों गैर-सैन्य स्थलों और शिक्षा व अनुसंधान के लिए जरूरी बुनियादी ढांचों को निशाना बनाया गया है। आज, लाखों स्कूली बच्चे और विश्वविद्यालय के छात्र शिक्षा व अनुसंधान से वंचित हो गए हैं। वह घर से पढ़ने को मजबूर हो गए हैं।
वहीं, ईरानी रेड क्रिसेंट और स्थानीय मीडिया ने बताया कि तेहरान के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय शाहिद बेहेशती विश्वविद्यालय की इमारतों को कल अमेरिका-इजराइल के हमले से नुकसान पहुंचा है।
ईरान का कहना है कि उसके विश्वविद्यालयों पर किए गए ये हमले देश की वैज्ञानिक और सांस्कृतिक नींव को कमजोर करने की एक कोशिश है।
वहीं, इजराइल इन हमलों को ईरान के परमाणु कार्यक्रम को कमजोर करने के बड़े प्रयासों का एक हिस्सा बताता है। वहीं, अमेरिका का कहना है कि उसकी सेनाएं जान-बूझकर आम नागरिकों को निशाना नहीं बनाती हैं। इन हमलों के जवाब में, तेहरान ने अमेरिका और इजराइल से जुड़े विश्वविद्यालयों को निशाना बनाने की धमकी दी है।
इससे पहले,अमेरिका-इजराइल ने शनिवार सुबह ईरान के बुशेहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर हमला किया था। नुक्लियर प्लांट के बाहर एक मिसाइल गिरी, जिससे एक व्यक्ति की मौत हो गई।
इस मिसाइल से ऊर्जा संयंत्र के पास बनी एक इमारत को नुकसान पहुंचा। जहां सुरक्षाकर्मी के तौर पर काम कर रहे एक व्यक्ति की जान चली गई। बता दें कि यह ईरान का एकमात्र चालू परमाणु ऊर्जा संयंत्र है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए एक कड़ा बयान जारी किया। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी तरह के रेडियोधर्मी रिसाव से तेहरान में नहीं, बल्कि खाड़ी देशों की राजधानियों में बड़े पैमाने पर जीवन समाप्त हो सकता है।
Updated on:
04 Apr 2026 06:42 pm
Published on:
04 Apr 2026 06:37 pm
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