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कौन हैं नामग्या खंपा, जो ट्रंप की ग्लोबल शांति बैठक में भारत की ओर से हुई शामिल? जानिए पूरा प्रोफाइल

Who Is Namgya Khampa: वॉशिंगटन डीसी में भारतीय दूतावास की कार्यवाहक प्रमुख नामग्या खंपा ने गाजा मुद्दे पर आयोजित “बोर्ड ऑफ पीस” की पहली बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व पर्यवेक्षक के रूप में किया।

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भारत

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Ashib Khan

Feb 20, 2026

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नामग्या खंपा भारत की तरफ से हुईं शामिल (Photo-X)

Who Is Namgya Khampa: वॉशिंगटन डीसी स्थित भारतीय दूतावास की कार्यवाहक प्रमुख नामग्या खंपा ने गाजा मुद्दे पर आयोजित बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर आयोजित की गई थी, जिसमें भारत ने पर्यवेक्षक के रूप में भाग लिया।

बता दें कि इस बोर्ड ऑफ पीस की घोषणा पिछले महीने विश्व आर्थिक मंच की दावोस बैठक के दौरान की गई थी। ट्रंप ने कहा था कि वे चाहते हैं कि हर देश इसका हिस्सा बने और भविष्य में यह संस्था संयुक्त राष्ट्र जैसी वैश्विक संस्था को भी चुनौती दे सकती है।

50 देशों के अधिकारी हुए शामिल

बैठक संयुक्त राज्य अमेरिका शांति संस्थान में हुई, जिसमें लगभग 50 देशों के अधिकारी शामिल हुए। इनमें 27 देश बोर्ड के औपचारिक सदस्य थे, जबकि भारत और यूरोपीय संघ सहित अन्य प्रतिभागियों ने पर्यवेक्षक के रूप में भाग लिया।

कौन हैं नामग्या खंपा?

विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, नामग्या सी खंपा 2000 बैच की भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी हैं। फरवरी 2026 से वह वाशिंगटन डीसी में भारतीय दूतावास में चार्ज डी’अफेयर्स (CDA) और उप मिशन प्रमुख के रूप में काम कर रही हैं। इस पद पर वह राजदूत की अनुपस्थिति में पूरे दूतावास की जिम्मेदारी संभालती हैं और भारत-अमेरिका के बीच प्रमुख कूटनीतिक कामकाज देखती हैं।

‘केरल की उच्चायुक्त भी रह चुकी हैं’

इससे पहले वह केन्या में भारत की उच्चायुक्त रह चुकी हैं, जहां उन्होंने दोनों देशों के रिश्ते मजबूत करने और विकास सहयोग को आगे बढ़ाने का काम किया। 2023 में केन्या में रहते हुए उन्हें सोमालिया में भारत के राजदूत के रूप में भी मान्यता दी गई थी।

केन्या जाने से पहले उन्होंने नेपाल की राजधानी काठमांडू में भारतीय दूतावास में उप मिशन प्रमुख के रूप में काम किया। उन्होंने चीन में भी दो अलग-अलग अवधि (2002–2006 और 2013–2016) में भारतीय मिशन में सेवाएं दीं।

2009 से 2013 तक वह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में तैनात रहीं। इस दौरान 2011–2013 के बीच वह संयुक्त राष्ट्र की प्रशासनिक और बजटीय मामलों की सलाहकार समिति (ACABQ) की सदस्य भी रहीं। उन्होंने यूएनडीपी और यूएनएफपीए के कार्यकारी बोर्ड में भारत का प्रतिनिधित्व भी किया।

नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय में रहते हुए उन्होंने अमेरिका, श्रीलंका और म्यांमार से जुड़े मामलों को संभाला। 2016 से 2018 तक वह प्रधानमंत्री कार्यालय में प्रतिनियुक्ति पर रहीं। इसके बाद उन्होंने मंत्रालय के विकास साझेदारी प्रभाग का नेतृत्व किया और 2018–2020 के दौरान पड़ोसी देशों को भारत की अनुदान सहायता और विकास सहयोग से जुड़े काम देखे।