
बाढ़ में बेघर हुए पीड़ित (फोटो- ANI)
Nepal Flood Survivors:नेपाल में आई भयानक बाढ़ ने कई परिवारों से उनके घर, सामान और रोजी-रोटी छीन ली है। नुवाकोट के गोरकुतार में एक स्कूल को अस्थायी राहत केंद्र में बदल दिया गया है, जहां लगभग 150 लोग शरण लिए हुए हैं, जिनके घर फ्लैश फ्लड में बह गए। पीड़ितों का कहना है कि इस आपदा में उन्होंने अपने घर और लगभग अपना सारा सामान खो दिया है। कई लोग अब इलाज और जरूरी दवाओं के खर्च के लिए मदद की उम्मीद कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि बाढ़ के दौरान हालात इतने खराब थे कि कई लोग अलग-अलग इलाकों में फंस गए। स्थानीय ग्रामीणों और सेना की मदद से कुछ लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया।
राहत शिविर में मौजूद एक नेपाली युवती ने अपनी घायल रिश्तेदार बच्ची की आपबीती बताते हुए कहा कि जब सैलाब आया, तब बच्ची स्कूल में थी। अचानक आए पानी के तेज बहाव में सब लोग जान बचाने के लिए भागने लगे और बच्ची वहीं फंस गई। इस दौरान वह बुरी तरह घायल हो गई। बच्ची जंगल के पास जिंदगी और मौत से जूझ रही थी, जहां आसपास कोई परिजन भी मौजूद नहीं था।
लड़की के मुताबिक, स्थानीय ग्रामीणों ने ऊंचाई से उसे देखा और रस्सियों के सहारे खींचकर बाहर निकाला। इसके बाद ग्रामीणों ने उसे पहले सेना के कैंप और फिर अस्पताल पहुंचाया। युवती ने बताया कि अस्पताल में प्राथमिक उपचार तो मिला, लेकिन आगे के गहन इलाज और जांच के लिए पैसे चाहिए, लेकिन आपदा में उनका सब कुछ बह चुका है।
होल्डिंग सेंटर में अपनी घायल बच्ची के पास बैठी मां ने भावुक होते हुए नेपाल में कहा कि बस यह सोचकर भागी कि अपने बच्चे को बचाऊंगी। युवती ने बताया कि बाढ़ के वक्त मां मजदूरी के लिए दूसरे पहाड़ पर थीं। जैसे ही उन्हें सैलाब और बच्चे के फंसे होने की खबर मिली, वे जंगलों, उफनते नालों और बाढ़ के पानी को पार करते हुए काठमांडू पहुंचीं और फिर वहां से नुवाकोट आईं।
वहीं, बच्ची के पिता भी सुदूरपश्चिम जिले से दिन-रात एक कर बाढ़ से लड़ते हुए किसी तरह परिवार के पास पहुंचे। रोते हुए मां ने कहा कि अब कुछ भी नहीं बचा है, बाढ़ के पानी में उनका घर, घर का सामान, कपड़े और राशन सब बह गया था।
युवती ने बताया कि आगे की मेडिकल जांच और बेहतर इलाज की जरूरत है, लेकिन उनके पास इसके लिए एक रुपया भी नहीं है। अभी, अस्थायी सेंटर में सिर्फ प्राथमिक इलाज और बुखार जैसी आम बीमारियों की दवाएं ही मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि अंदरूनी चोटों का पता नहीं चल पाया है, इसलिए सही जांच के लिए अस्पताल ले जाना बहुत जरूरी है।
राहत शिविर में ठहरे करीब 150 लोगों की स्थिति बेहद दयनीय है। शिविर में मौजूद एक बुजुर्ग महिला ने आंखों की रोशनी कमजोर होने और शरीर के असहनीय दर्द की शिकायत करते हुए कहा कि रेड क्रॉस ने जो दवाएं दी हैं, वे काफी नहीं हैं। पीड़ितों ने बताया कि उनके पास ओढ़ने के लिए चादरें तक नहीं हैं और कड़ाके की ठंड व नमी के बीच उन्हें स्कूल के ठंडे फर्श पर रातें गुजारनी पड़ रही हैं।
बेघर हुए परिवारों ने सरकार, प्रशासन और मानवीय राहत एजेंसियों से गुहार लगाई है कि उनके घायल बच्चों और बुजुर्गों के समुचित इलाज की व्यवस्था की जाए और भोजन, गर्म कपड़े व पुनर्वास के लिए तुरंत ठोस कदम उठाए जाएं।
Updated on:
1 Sep 2026, 9:48 PM IST
Published on:
1 Sep 2026, 9:48 PM IST
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