
नई दिल्ली।
क्वाड के बाद अब क्या न्यू क्वाड की तैयारी हो रही है, क्योंकि ऐसी चर्चा इन दिनों जोर-शोर से चल रही है। खासकर, भारत, अमरीका, संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई और इजरायल के विदेश मंत्रियों की पिछले दिनों हुई बैठक के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है।
हाल ही में हुई भारत और अमरीका के अलावा संयुक्त अरब अमीरात तथा इजरायल के विदेश मंत्रियों की मुलाकात को मध्य-पूर्व में एक नए सामरिक और राजनीतिक ध्रुव के रूप में देखा जा रहा है।
कूटनीतिक क्षेत्रों में इन चारों देशों के साथ आने को 'न्यू क्वॉड' या नया 'क्वॉडिलैटरल सिक्यॉरिटी डायलॉग' कहा जा रहा है। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर, इसराइल के दौरे पर हैं और इस बैठक में वह इसराइल के विदेश मंत्री येर लेपिड के साथ यरुशलम से शामिल हुए।
इस दौरान एशिया और मध्य-पूर्व में अर्थव्यवस्था के विस्तार, राजनीतिक सहयोग, व्यापार और समुद्री सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक के बाद जयशंकर ने इस संबंध में ट्वीट भी किया और उम्मीद जताई कि जल्द ही बैठक में जिन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई, उन्हें आगे बढ़ाया जाएगा। इस बैठक में अमरीका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री शेख़ अब्दुल्लाह बिन जायद अल नहयान भी मौजूद थे।
सामरिक मामलों के जानकार मानते हैं कि भारत ने हमेशा मध्य-पूर्व के मामलों में अमेरिका से दूरी ही बनाए रखी थी। पिछले साल अमेरिका ने कई खाड़ी के देशों के बीच 'एब्रहामिक एकॉर्ड' या 'एब्रहामिक समझौते' पर हस्ताक्षर करने में बड़ी भूमिका निभायी थी, जिसकी वजह से संयुक्त अरब अमीरात और इजरायल के बीच राजनयिक संबंध स्थापित हुए।
यह समझौता पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शासनकाल में किया गया था। विशेषज्ञों के मुताबिक, अमरीका में जब जो बिडेन ने सत्ता संभाली तो लगा कि वह ट्रंप के फैसलों और नीतियों से खुद को अलग कर लेंगे।लेकिन बिडेन ने भी ''एब्रहामिक एकॉर्ड' का सम्मान करते हुए इसे आगे बढ़ाया। चारों देशों के विदेश मंत्रियों की ये बैठक उसी दिशा में आयोजित की गई।
भारत के संबंध संयुक्त अरब अमीरात से भी काफी अच्छे रहे हैं और इजरायल से भी है। इसीलिए अमरीका भी चाहता है कि मध्य-पूर्व में भारत एक अहम भूमिका निभाए। भारत भी मध्य-पूर्व में नई भूमिका निभाने के अवसर तलाश कर ही रहा था, जो उसे मिल गया है। ये चार देश एक साथ आए तो हैं बात भी की है और आपसी सहमति भी बनी है, लेकिन सब कुछ निर्भर करता है कि इसके परिणाम क्या होंगे। तब कहीं इसको गंभीरता से लिया जा सकता है।
Published on:
20 Oct 2021 11:06 am
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