
Pakistan terrorist army links
Pakistan Army terrorist links: भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान के दोहरा चेहरे बेनकाब कर (Pakistan terrorism double standards) दिया है। एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसे पाकिस्तानी सेना (Pakistan Army) ने धार्मिक सौहार्द का प्रतीक बताने (Pakistan terrorist army links) की कोशिश की, लेकिन असल में उस तस्वीर में दिख रहा शख्स कोई धार्मिक मौलवी नहीं, बल्कि अमेरिका की ओर से घोषित एक वैश्विक आतंकवादी निकला। भारत की ओर से हाल ही में पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ( Operation Sindoor) के बाद यह खुलासा हुआ है, जिसमें नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था।
पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि वायरल हो रही तस्वीरों में दिख रहा व्यक्ति एक मौलवी और साधारण राजनीतिक कार्यकर्ता है। उन्होंने उसके राष्ट्रीय पहचान पत्र (ID कार्ड) तक पेश किए, लेकिन भारत की खुफिया एजेंसियों ने उन दावों की सच्चाई उजागर कर दी।
भारत ने जो तथ्य पेश किए, उनके मुताबिक तस्वीर में दिख रहा व्यक्ति हाफिज अब्दुर रऊफ (Hafiz Abdur Rauf exposed) है, जो लश्कर-ए-तैयबा का एक वरिष्ठ नेता, जमात-उद-दावा और FIF जैसे आतंकी संगठनों का सक्रिय सदस्य है। यही नहीं, अमेरिका के ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने भी इस व्यक्ति को "Specially Designated Global Terrorist" (SDGT) घोषित कर रखा है।
लश्कर-ए-तैयबा के लिए 1999 से सक्रिय, रऊफ न केवल एक आतंकी संगठन के नेता हैं, बल्कि उसने कई वर्षों तक जमात-उद-दावा (JuD) की मानव सेवा इकाई का नेतृत्व किया है।
जानकारी के अनुसार सन 2008 के मुंबई हमलों के बाद जब अंतरराष्ट्रीय दबाव में लश्कर को पीछे हटना पड़ा, तब रऊफ ने ‘फाउंडेशन फॉर इम्प्लीमेंटेशन ऑफ फंडामेंटल्स (FIF)’ नामक एक NGO की आड़ में फंडरेज़िंग और आतंकी गतिविधियों को जारी रखा।
उसने सन 2009 में FIF के नाम से पाकिस्तान में एक बड़े फंडरेज़र कार्यक्रम में भी भाग लिया था, जिसका उद्देश्य आतंकियों के लिए आर्थिक सहायता जुटाना था। इसके अलावा रऊफ ने कई बार प्रेस और टीवी के ज़रिये FIF और LET की गतिविधियों को वैध ठहराने की कोशिश की है।
भारत की ओर से साझा की गई तस्वीरों में पाकिस्तानी सेना और पुलिस के वर्दीधारी जवान प्रतिबंधित आतंकी संगठन जमात-उद-दावा के मारे गए आतंकियों के जनाज़े में शरीक होते हुए देखे गए। जनाज़े में जिन आतंकियों के शव ताबूतों में थे, वे अब्दुल मलिक, खालिद और मुदस्सिर थे , ये सभी भारत-विरोधी हमलों में सक्रिय रहे थे। भारत का दावा है कि इन आतंकियों को पाकिस्तानी सेना ने राजकीय सम्मान के साथ दफनाया, और ये सब आतंकवाद के लिए पाकिस्तान की सेना के समर्थन का प्रमाण है।
पाकिस्तान और PoK में भारत ने 7 मई को "ऑपरेशन सिंदूर" शुरू किया, जो भारत के पहलगाम में किए गए आतंकी हमले का बदला था। इस सटीक और योजनाबद्ध हमले में भारतीय सेना ने नौ आतंकी लॉन्च पैड्स को तबाह कर दिया था। भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस हमले में नागरिक नहीं मारे गए, बल्कि पाकिस्तान की ओर से प्रशिक्षित और संरक्षित आतंकी ही निशाना बने थे।
बहरहाल ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब पाकिस्तान ने आतंकियों को धार्मिक या सामाजिक कार्यकर्ता बता कर दुनिया को धोखा देने की कोशिश की हो। पाकिस्तान सरकार इससे पहले भी हाफिज सईद, मसूद अजहर और अन्य आतंकियों को राजनीतिक और धार्मिक कार्यकर्ता बता चुके हैं। वहीं रऊफ को लेकर भी यही रणनीति अपनाई गई और पाक सेना ने परिचय पत्र दिखा कर उसे निर्दोष साबित करने की कोशिश की, लेकिन अंतरराष्ट्रीय और भारतीय खुफिया एजेंसियों के पास मौजूद रिकॉर्ड्स ने इस झूठ की पोल खोल दी।
Published on:
12 May 2025 07:41 pm
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