18 अप्रैल 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

ईरान से दोस्ती पाक को पड़ गई बहुत महंगी, UAE के दबाव से हालत हुई और पतली, अब बचने के सभी रास्ते बंद

पाकिस्तान इन दिनों 'न घर का, न घाट का' वाली हालत में पहुंच गया है। आईएमएफ की सख्त शर्तें, बढ़ते तेल दाम और अब सबसे करीबी दोस्त यूएई ने भी अरबों डॉलर वापस मांग लिए हैं।

2 min read
Google source verification

भारत

image

Mukul Kumar

Apr 18, 2026

Pakistan's Prime Minister Shahbaz Sharif

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (फोटो- Jaiky Yadav एक्स पोस्ट)

पाकिस्तान की जो हालत इन दिनों है उसे देखकर यही कहावत याद आती है कि 'न घर का, न घाट का।' एक तरफ इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) की शर्तें पूरी करने की जद्दोजहद, दूसरी तरफ तेल के बढ़ते दाम और अब सबसे करीबी दोस्त यूएई ने भी अरबों डॉलर वापस मांग लिए हैं। पाकिस्तान के लिए यह वक्त शायद पिछले कई सालों में सबसे मुश्किल है।

यूएई ने थमाया 3.5 अरब डॉलर का बिल

इस महीने की शुरुआत में पाकिस्तान सरकार ने खुद एलान किया कि वो यूएई को 3.5 अरब डॉलर के कर्ज वापस करेगा। इसमें एक 45 करोड़ डॉलर का वो पुराना कर्ज भी शामिल है जो पाकिस्तान ने 1990 के दशक के आखिर में लिया था। यह भी पैसा दशकों से लटका हुआ था।

दिलचस्प बात यह है कि यह रकम उसके पूरे विदेशी मुद्रा भंडार का लगभग पांचवां हिस्सा है। यानी एक झटके में खजाने का 20 फीसदी खाली हो जाएगा। जो थोड़ी बहुत मेहनत से आईएमएफ की शर्तें पूरी करने के लिए जमा किया था, वो भी चला जाएगा।

ईरान से दोस्ती पड़ी महंगी

असली सवाल यह है कि यूएई ने अचानक पैसे वापस क्यों मांगे? जियोपॉलिटिकल मॉनिटर की रिपोर्ट में जो बात सामने आई है वो बेहद दिलचस्प है।

माना जा रहा है कि पाकिस्तान की ईरान से बढ़ती नजदीकी यूएई को रास नहीं आई। खाड़ी देशों में ईरान को लेकर पहले से तनाव है और पाकिस्तान अगर ईरान की तरफ झुकता है तो यूएई नाराज होगा ही।

इसके अलावा पाकिस्तान ने हाल ही में सऊदी अरब के साथ एक रक्षा समझौता किया है। यमन के मुद्दे पर सऊदी और यूएई के बीच खींचतान जगजाहिर है। तो पाकिस्तान ने एक तरफ ईरान को खुश किया, दूसरी तरफ सऊदी से हाथ मिलाया और नतीजा यह हुआ कि यूएई नाराज हो गया।

तेल के दाम और आईएमएफ की मार अलग से

जब घर में पहले से आग लगी हो तो बाहर से भी हवा आ जाए तो क्या हाल होगा? पाकिस्तान के साथ यही हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम बढ़ रहे हैं और अनुमान है कि सिर्फ तेल आयात की वजह से पाकिस्तान का खर्च 1 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है।

सितंबर 2024 में IMF ने जो बेलआउट पैकेज दिया उसमें शर्त थी कि पाकिस्तान अपना विदेशी मुद्रा भंडार 10 अरब डॉलर से ऊपर रखे। UAE को पैसे लौटाने के बाद यह शर्त पूरी करना और भी मुश्किल हो जाएगा।

दोस्त देशों पर निर्भरता बनी अभिशाप

पाकिस्तान की विदेश नीति हमेशा से कर्ज और खैरात पर टिकी रही है। चीन का CPEC हो, सऊदी का तेल या UAE का पैसा, हर जगह पाकिस्तान ने दोस्ती को कर्ज में बदला। अब जब दोस्त ही पैसे मांगने लगे हैं तो रास्ता निकालना आसान नहीं होगा।